पटना: बिहार बोर्ड के टॉपर घोटाले में सोमवार को निगरानी की विशेष अदालत में एसआइटी ने बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लालकेश्वर प्रसाद सिंह समेत 32 आरोपितों के ख़िलाफ आरोप-पत्र दाख़िल किये। आरोप-पत्र के साथ दो बक्सों में बंद घोटाले के काग़ज़ात भी कोर्ट में पेश किए गए।
आरोप-पत्र के अनुसार इंटर परीक्षा, 2016 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में सरकारी पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए मेरिट लिस्ट बनायी गयी थी। मामला उजागर होने पर मेरिट लिस्ट के छात्र और छात्राओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और उन्हें अयोग्य पाने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर एसआइटी ने जांच की।
ग़ौरतलब है कि मीडिया में टॉपर्स के बयान के बाद छह जून, 2016 को कोतवाली थाने में बिहार बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। जांच में इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ और कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई। जिन लोगों के ख़िलाफ चार्जशीट दायर की गई है उनमें बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह, उनकी पत्नी पूर्व विधायक उषा सिन्हा, वैशाली के वीआर कॉलेज का प्रिंसपल अमित कुमार उर्फ बच्चा राय, पूर्व सचिव हरिहर नाथ झा आदि शामिल हैं।
इस बीच इंटर टॉपर्स घोटाले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अगर कोई भरोसा तोड़ता है तो उसको सज़ा मिलेगी और इस मामले में बिहार नज़ीर बनेगा।
मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस पर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित राजकीय शिक्षा पुरस्कार समारोह उद्घाटन करते हुए कहा कि गड़बड़ी करनेवालों को बख्शा नहीं जायेगा। नीतीश ने घटना को उजागर करने के लिए मीडिया को धन्यवाद दिया।