मुंबई: जापान इंटरनेशनल कोओपरेशन एजेंसी (जीका) यूं तो महाराष्ट्र की कई आधारभूत परियोजनाओं को कोष मुहैया करा रही है लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार 30,000 करोड़ रुपए की लागत के प्रस्तावित मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे के लिए जीका से कोष लेने को उत्सुक नहीं है।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम इस 700 किलोमीटर लंबी आठ लेन की परियोजना का काम संभाल रहा है और इस साल अक्टूबर तक इस पर काम शुरू करके 2019 में खत्म करना चाहता है। गौरतलब है कि उस समय देश और राज्य दोनों जगह चुनाव होने हैं।
निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक एस. एम. रामचंदानी ने कहा, प्रस्तावित मुंबई-नागपुर सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे एक बड़ी परियोजना है और हमें विभिन्न एजेंसियों से कोष जुटाने की जरूरत होगी। हम विभिन्न राष्ट्रीय और बहुपक्षीय ऋणदाताओं जैसे कि एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक से बातचीत की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि वह इस परियोजना के लिए केंद्रीय कोष की उम्मीद भी कर रहे हैं।
फडणवीस सरकार इस परियोजना के लिए जीका से कोष लेने के प्रति अनिच्छुक है क्योंकि वह परियोजनाओं के लिए ऋण मंजूर करने में देरी करता है। रामचंदानी ने कहा, हमने नागपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए जीका से संपर्क नहीं किया है। हम जल्द से जल्द इस पर काम शुरू करना चाहते हैं। पहले हमारा अनुभव रहा है कि जीका अपनी अनुमति देने में बहुत समय लगाता है और हमारे पास उतना समय नहीं है। जीका ने राज्य की मुंबई ट्रांसहार्बर लिंक परियोजना और कोलाबा बांद्रा स्पीज भूमिगत मेट्रो परियोजना के लिए ऋण की सैद्धांतिक मंजूरी देने के करीब एक वर्ष बाद हाल ही में अंतिम मंजूरी दी है।