नई दिल्ली: तंजानिया समेत अन्य अफ्रीकी देशों में असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के हालात में सुधार के लिए भारत से बहुत कुछ सीखने का सुखद अनुभव मिला है। ये बात एक स्वर से कही अफ्रीकी महाद्वीप में घरेलू कामकाज, खेती, हस्तशिल्प, फुटकर व्यवसाय एवं अन्य कई असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के स्वं सहायता समूहों एवं ट्रेड यूनियन नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने।
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तंजानिया से भारत आया 15 सदस्यीय यह प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में तंजानिया उच्चायोग में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद था। भारत और अफ्रीका की महिलाओं के स्वावलंबन के लिए एक पुल का काम करने वाले कार्यक्रम- सेतु अफ्रीका के तहत यह कार्यशाला भारत के एक जाने-माने सामाजिक संगठन- सेवा (स्व नियोजित महिला संगठन) ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और तंजानिया सरकार के सहयोग से आयोजित किया था।
तंजानिया के इस प्रतिनिधिमंडल ने पिछले 27 नवंबर से 11 दिसंबर तक अहमदाबाद, दिल्ली समेत देश के कुछ दूसरे शहरों और आसपास के गांवों में असंगठित क्षेत्रों की महिला कामगारों और उनके बीच सेवा के काम करने के तौर-तरीकों को बारीकी से देखा-परखा और अपने अनुभवों को इस कार्यक्रम में साझा किया।
अफ्रीकी महिला संगठनो के इन प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्हें भारत में ये जानने समझने का बेहतरीन मौका मिला कि किस तरह ग्रास रुट स्तर पर महिला कामगार संगठन खड़े किये जा सकते हैं साथ ही माइक्रो फाइनेंस लघु व्यवसाय, स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल के मामले में महिलाओं को किस तरह ज्यादा से ज्यादा सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसके अलावा तंजानिया में महिला उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने के लिए उनके उत्पादों को एक बड़ा बाजार मुहैया कराने के लिए भारत से खास तौर से सेवा संगठन से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला।
इस कार्यक्रम में तंजानिया के उच्चायुक्त हिजा मोहम्मद, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के निदेशक मोहित यादव, विमो सेवा की अध्यक्क्ष मिराई चटर्जी, सेतु अफ्रीका कार्यक्रम से प्रोजेक्ट डाइरेक्टर श्रीकांत कुमार और सेवा भारत की
समन्वयक अर्चना टोप्पो ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखे।