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कफन में पति, कोमा में पत्नी, दाह संस्कार के कानूनी पचड़े में परिवार, जानिए क्‍या है पूरा मामला

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 18, 2016 05:30 pm IST,  Updated : Jul 18, 2016 09:19 pm IST

हिंदुस्तान से हजारों किलोमीटर दूर एक सड़क पर हादसा हुआ। जिसमें एक परिवार में मातम छा गया। जिसमें हादसे में पति की मौत हो गई। पत्नी कोमा में है और डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं। वही दूसरी ओर मासूम बेटा अस्पताल में दर्द से तड़प रहा है। जानिए आखिर क्या है

chandan with parents
chandan with parents

फेसबुक के जरिए दोस्त ने दी मुंबई में खबर
अमेरिका में हुए इस हादसे की जानकारी परिवार में किसी को नहीं थी। न्यूयॉर्क में ही रहनेवाले चंदन के दोस्त राजेश काडियाल ने फेसबुक के जरिए परिवार के नाम पैगाम छोड़ा। हादसे की जानकारी मिलते हैं चंदन गवई के दोनों भाई स्वपनिल और आनंद न्यूयॉर्क पहुंच गए । अमेरिका में दोनों को कोई नहीं जानता था।

लिहाजा डेड सर्टिफिकेट लेने और शवों को लेने की प्रक्रिया में काफी वक्त लगा। पूरी कार्रवाई होने के बाद वहां के अफसरों ने जो बताया उसे सुनकर दोनों भाई सन्न रह गए  अमेरिकी कानून के गाइडलाइन के मुताबिक"पिता और मां का शव उनके बेटों को सौंपा जा सकता है। चंदन गवई का शव उनके भाई नहीं ले सकते हैं। चंदन के अंतिम संस्कार के लिए पत्नी की मंजूरी जरूरी। पत्नी के कोमा से लौटने तक चंदन का अंतिम संस्कार नहीं होगा"

इसके बाद अमेरिकी कानून के मुताबिक अफसरों ने इस मसले का नया हल निकाया वो चंदन गवई का शव देने के लिए राजी हुए लेकिन उनके अंतिम संस्कार की जगह उन्हें दफनाने की शर्त रख दी।

छोटे भाई ने एक वीडियों के जरिए लगाई मदद की गुहार
थक-हारकर छोटे भाई स्वप्निल ने एक वीडियो मैसेज ट्वीट किया...
ट्विट का सुषमा स्वराज ने दिया जवाब
इस ट्विटस से स्वप्निल के कल्याण में रहने वाले दोस्तों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को रीट्वीट कर दिया। जिसपर सुषमा स्वराज ने तुरंत जवाब दिया और लिखा कि न्यूयॉर्क की कॉन्सुलेट जनरल नियमित रूप से मेरे संपर्क में हैं। वो फैमिली को मदद दिला रही हैं।

माता-पिता का अंतिम संस्कार वहां (न्यूयॉर्क में) किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी कानून चंदन के अंतिम संस्कार की इजाजत तब तक नहीं देगा, जब तक उनकी वाइफ कोमा में हैं और वे इस पर अपनी रजामंदी नहीं दे देती हैं। मैं निजी तौर पर पूरे मामले को मॉनिटर कर रही हूं और मेरे पास इसकी पूरी जानकारी है।

परदेस में भले ही इंडियन एंबेसी के अधिकारियों से इस परिवार को कोई मदद न मिली हो...लेकिन अब सुषमा स्वराज के ट्वीट से इन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही इनके परिजनों के शव भारत लाए जा सकेंगे।

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