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भारत अब हर महीने करेगा एक प्रक्षेपण

 Written By: IANS
 Published : Jan 21, 2016 09:38 am IST,  Updated : Jan 21, 2016 09:38 am IST

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपना दबदबा बढ़ाते हुए बुधवार को कहा कि अब वह हर महीने एक उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा।

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श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपना दबदबा बढ़ाते हुए बुधवार को कहा कि अब वह हर महीने एक उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा। ट्रांसपोंडर्स तथा वैज्ञानिक उपकरणों सहित अपने अंतरिक्ष आधारित परिसंपत्तियों से बढ़ रही जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत हर महीने एक उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। अमेरिका की जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) जैसी क्षमता हासिल करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए बुधवार को भारत ने अपने पांचवें नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर दिया। भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली भारत तथा इसके आस-पास के 1500 किमी के क्षेत्र में परिशुद्ध वास्तविक-काल स्थिति तथा समय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारत की अपनी क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष ए.एस.कृष्ण कुमार ने यहां कहा, "इस साल की शुरुआत हमने पांचवें नौवहन उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ की है, जो एक महत्वपूर्ण सफलता है। क्योंकि इसे सटीक तौर पर इच्छित कक्षा में स्थापित किया गया। मांग पूरी करने के लिए हम हर महीने एक उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहे हैं।" इसरो फरवरी तथा मार्च में दो और नौवहन उपग्रहों के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। जिसके बाद, स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ एक से चार टन के रॉकेट के साथ पृथ्वी अवलोकन, रिमोट सेंसिंग व संचार आधारित अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण किया जाएगा। पांचवें नौवहन उपग्रह के सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद कुमार ने मिशन नियंत्रण केंद्र में वैज्ञानिकों से कहा, "हमें लंबा फासला तय करना है, क्योंकि अगले दो महीनों में हमें नौवहन के सातों उपग्रहों (आईआरएनएसएस) में से बाकी बचे उपग्रहों का प्रक्षेपण करना है, जिसके बाद विभिन्न प्रकार के बहुद्देश्यी उपग्रहों के प्रक्षेपण को लेकर हम अन्य मिशनों पर काम करेंगे।" अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि बाद में उपग्रह (आईआरएनएसएस-1ई) को पृथ्वी से 20,655 किलोमीटर की दूरी पर एक अंडाकार कक्षा में भूमध्य रेखा से 19.21 डिग्री के कोण पर स्थापित किया गया है।

संगठन का मास्टर नियंत्रण केंद्र हासन में है, जो कर्नाटक से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां अगले दो सप्ताह के दौरान भूसमकालिक कक्षा में स्थापित करने के लिए 1,425 किलोग्राम वजनी उपग्रह के पोजीशन में चार बार परिवर्तन किया जाएगा। कुमार ने कहा, "इस प्रक्षेपण के साथ ही हमने यह साबित कर दिखाया है कि पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) एक विश्वसनीय रॉकेट है और देश की जरूरतों के लिए यह विभिन्न कार्यो वाले उपग्रहों को अंतरिक्ष तक ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।" स्ट्रैप-ऑन बुस्टर के साथ पीएसएलवी-सी31का यह 33वां प्रक्षेपण मिशन था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सितंबर 1993 में पहली बार पहले प्रक्षेपण के साथ इसकी सहायता से अब तक 32 सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। उपग्रह केंद्र के निदेशक एम.अन्नादुरई ने आईएएनएस से कहा, "हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमने साल 2015 में चार पीएसएलवी तथा एक जीएसएलवी (भू-समकालिक प्रक्षेपण यान) रॉकेट सहित पांच मिशन लॉन्च किए। जुलाई से लेकर अब तक हम चार मिशन लॉन्च कर चुके हैं, जिसमें पहला जुलाई, दूसरा अगस्त (जीएसएलवी), तीसरा सितंबर तथा चौथा दिसंबर में किया गया।"

स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ अगस्त 2015 में जीएसएलवी, दिसंबर 2014 में जीएसएलवी-मार्क-3 तथा जनवरी 2014 में जीएसएलवी-मार्क-2 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही अंतरिक्ष एजेंसी की योजना इस साल अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क-3 के प्रक्षेपण की है, जो पृथ्वी से 36 हजार किलोमीटर दूर चार टन वजनी उपग्रह को अपने साथ ले जाएगा। अन्नादुरई ने कहा, "विभिन्न जरूरतों की पूर्ति के लिए देश, देश भर में अन्य उपयोगकर्ताओं तथा विदेशों में विभिन्न उपग्रहों की मांग बढ़ती ही जा रही है। संचार, प्रसारण, नौवहन, पृथ्वी अवलोकन तथा रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन प्रदान करने के अलावा हमें 10-12 साल पुराने अंतरिक्ष यान को भी बदलना है, जिसका जीवनकाल अब खत्म होने को है।" एक अनुमान के मुताबिक, अंतरिक्ष एजेंसी अगले पांच से छह वर्षो के दौरान ध्रुवीय व भूसमकालिक कक्षाओं में लगभग 80 उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगी। इसके अलावा इसकी वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स अगले दो वर्षो में लगभग 40 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगी। अंतरिक्ष एजेंसी अगले दो वर्षो में द्वितीय चंद्र मिशन अभियान तथा सौर अवलोकन (आदित्य-1) की भी तैयारी कर रही है।

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