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पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच बातचीत के दौरान नहीं उठा कश्मीर मुद्दा- विदेश सचिव गोखले

 Reported By: Bhasha
 Published : Oct 12, 2019 04:44 pm IST,  Updated : Oct 12, 2019 04:44 pm IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को कारोबार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक नया तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। 

Foreign Secretary Vijay Gokhale- India TV Hindi
Foreign Secretary Vijay Gokhale addresses a press conference after a meeting between Chinese President Xi Jinping and Indian Prime Minister Narendra Modi. Image Source : PTI

मामल्लापुरम: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को कारोबार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक नया तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन पर कदम उठाने सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

छह घंटे हुई दोनों नेताओं में बातचीत

विदेश सचिव विजय गोखले ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि समुद्र के किनारे भव्य मामल्लापुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच कुल मिलाकर छह घंटे आपसी चर्चा हुई। गोखले ने यह भी बताया कि इस अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शी ने आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचारविमर्श किया जाएगा।

न तो कश्मीर मुद्दा उठा और न ही इस पर कोई चर्चा हुई- गोखले

विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही और अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में न तो कश्मीर मुद्दा उठा और न ही इस पर कोई चर्चा हुई। राष्ट्रपति शी ने दोनों देशों के बीच और अधिक सम्पर्क पर जोर दिया और खास तौर पर रक्षा क्षेत्र में सम्पर्क बढ़ाने का जिक्र किया।

‘दोनों देशों को भविष्य की ओर देखने की जरूरत’

विदेश सचिव ने बताया ‘‘शी और पीएम मोदी दोनों ने ही कहा कि दोनों देशों को भविष्य की ओर देखने की जरूरत है। साथ ही दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि दोनों देशों को आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए साथ काम करना चाहिए।’’

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पिछले दो दिनों में कई सत्रों में हुई आमने-सामने की करीब छह घंटे की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि “चेन्नई संपर्क” के जरिए भारत और चीन के संबंधों में सहयोग का आज से एक नया युग शुरू होने जा रहा है।

‘चीन व्यापार घटा कम करने के लिए कदम उठाने को तैयार’

गोखले के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन व्यापार घाटा कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की खातिर तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि व्यापार और निवेश संबंधी मुद्दों के लिए एक नया तंत्र स्थापित किया जायेगा जो कारोबार, निवेश एवं सेवा क्षेत्र से जुड़ा होगा। चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री हु छुन ह्वा और भारत की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसका नेतृत्व करेंगे।

गोखले ने कहा कि इसकी रूपरेखा राजनयिक चैनलों के जरिये तय हो जायेगी। चीनी राष्ट्रपति ने आईटी और फार्मा क्षेत्र में भारत की ओर से चीन में निवेश का स्वागत किया। दोनों देशों ने इस प्रस्तावित तंत्र के जरिये विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। गोखले ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति ने रक्षा सहयोग बढ़ाने की जरूरत के बारे में बात की और आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचारविमर्श किया जाएगा।

राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने पर 70 कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। साथ ही दोनों नेताओं ने महसूस किया कि दोनों देशों को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करना चाहिए। दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने पर 70 कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय किया है जिसमें 35 कार्यक्रम भारत में और 35 कार्यक्रम चीन में होंगे।

क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इसको लेकर आशान्वित है लेकिन इसमें संतुलन होना चाहिए। कारोबार, सेवा और निवेश में संतुलन होना चाहिए । गोखले के अनुसार, इस पर राष्ट्रपति शी ने कहा कि इस विषय पर भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि आरसीईपी 16 देशों का प्रस्तावित साझा कारोबार ब्लाक है। दोनों नेताओं के बीच यह शिखर वार्ता ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले पर दो एशियाई देशों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ ।

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