1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. जानें क्या है रमज़ान और कैसे रखे जाते हैं रोज़े

जानें क्या है रमज़ान और कैसे रखे जाते हैं रोज़े

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 26, 2017 02:42 pm IST,  Updated : May 26, 2017 02:42 pm IST

ईद-उल-फ़ितर के ठीक एक महीने पहले मुसलमान एक महीने तक उपवास यानी रोज़े रखते हैं। इस्लाम में रमज़ान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है। भारत में रमज़ान संभवत: रविवार से शुरु हो रहे हैं।

Ramzan- India TV Hindi
Ramzan

भारत कई धर्मों और संस्कृतियों का देश है। सभी धर्मों और आस्थाओं का एक ही मक़सद है और वो है प्रेम और करुणा। इस्लाम धर्म भी प्रेम और करुणा का संदेश देता है। इस्लाम में दो बड़े त्योहार हैं- ईद-उल-फ़ितर (जिसे मीठी ईद भी कहते हैं) और ईद-उल-ज़ुहा (जिसे बक़रीद भी कहते हैं)। ईद-उल-फ़ितर के ठीक एक महीने पहले मुसलमान एक महीने तक उपवास यानी रोज़े रखते हैं। इस्लाम में रमज़ान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है। भारत में रमज़ान संभवत: रविवार से शुरु हो रहे हैं। हम यहां आपको बताने जा रहे हैं रमज़ान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

क्या है रमज़ान का महीना

मुस्लिम धर्म में चांद का बहुत महत्व है। इस्लामिक कैलेडर में चांद के अनुसार महीने के दिन तय होते हैं जो 30 या 29 दिन का होता है। रमज़ान का महीना अंग्रेज़ी कैलेंडर के मुताबिक़ हर साल 10 दिन पहले आता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमज़ान का महीना नौवे महीने में आता है। इस महीने के नियम बहुत कठिन होते हैं।

रमज़ान का इतिहास 

रमज़ान के माह को शब-ए-क़दर कहा जाता है। कहाजा है कि अल्लाह ने इसी दिन अपने बंदों को क़ुरअ्न शरीफ़ से नवाज़ा था और इसीलिये इस महीने को पवित्र माना जाता है और मुसलमान रोज़ा रखते हैं।

कैसे रखते हैं रोज़े

सहरी- रोज़े की शुरुआत सहरी से होती है। मुसलमान सूरज निकलने के देढ़ घंटे पहले उठकर कुछ खाते हैं और इसी के साथ रोज़ा शुरु हो जाता है यानी इसके बाद वे शाम तक इफ़्तार के पहले कुछ खा-पी नहीं सकते। सहरी के बाद नमाज़ भी पढ़ी जाती है।

इफ़्तार-शाम को निर्धारित समयानुसार रोज़ा खोला जाता है जिसे इफ़्तार कहते हैं। इफ़्तार के बाद नमाज़ पढ़ी जाती है।

तरावीह- रात को एक निश्चित समय पर तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है। ये समय लगभग 9 बजे का होता है। इसके अलावा मस्जिदों में भी क़ुरअ्न पढ़ा जाता है। ये सिलसिला पूरे महीने जारी रहता है। 29 या 30 दिन बाद ईद मनाई जाती है।

रमज़ान के नियम

कहा जाता है कि रमज़ान में रोज़ा रखने से इंसान और ख़ुदा के बीच दूरी कम होती है। रमज़ान के नियम बहुत कठिन होते हैं। 

ख़ुदा की इबादत

रमज़ान में रोज़ा रखने के अलावा अल्लाह का नाम लिया जाता है और नमाज़ पढ़ी जाती है।

ग़लत कामों से दूरी

रमज़ान के महीने में ख़ासकर ग़लत कामों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। नशा से दूर रहा जाता है और यहां तक कि ग़लत देखने, सुनने और बोलने की भी मनाही है।

मारपीट, हिंसा की मनाही

रमज़ान में किसी भी प्रकार की हिंसा को बहुत ग़लत माना जाता है। हिंसा में हाथ-पैर का इस्तेमाल रमज़ान के नियमों का उल्लंघन माना जाता है। लड़ाई देखना भी ग़लत माना जाता है।

महिलाओं के प्रति अच्छी भावना

रमज़ान के महीने सेक्स की इजाज़त नही है। अपनी पत्नी को वासना की नज़र से देखना भी मना है। रमज़ान में महिलाओं के प्रति सम्मान दिखाने की हिदायत दी गई है।

दान-पुण्य का महीना है रमज़ान

रमज़ान में दान का बहुत महत्व है। इसे ज़क़ात कहते हैं। सभी लोगों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी हैसियत के अनुसार दान करें और नेकी का काम करें।

गुनाहों से तौबा करने का महीना

रमज़ान में लोगों से उनके गुनाह क़ुबूल कर माफ़ी मांगने को कहा गया है। इससे न सिर्फ़ उनका दिल हल्का हो जाता है बल्कि गुनाह के एहसास के साथ भविष्य में ऐसी ग़लती न करने का भी जज़्बा पैदा होता है। 

जन्नत के लिए दुआ

रमज़ान में लोग जन्नत पाने की दुआ करते हैं। इसे जन्नतुल फ़िरदौस कहते हैं, इसे जन्नत का सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है।

किसके के लिए अनिवार्य है और किसे छूट है रोज़े से

रोज़ा मुस्लिम परिवार के हर सदस्य के लिए अनिवार्य है लेकिन कुछ मामलों में छूट है।

  • पांच साल से छोटे बच्चे के लिए रोज़ा अनिवार्य नही है।
  • बहुत बुज़ुर्ग या बीमार लोगों को रोज़े से छूट है।
  • गर्भवती अथवा बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी रोज़ा अनिवार्य नही है।
Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत