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कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा, उन्नाव बलात्कार मामले में कोर्ट का आया फैसला

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 20, 2019 02:16 pm IST,  Updated : Dec 20, 2019 03:39 pm IST

उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी कुलदीप सेंगर को कोर्ट ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

kuldeep singh sengar- India TV Hindi
kuldeep singh sengar

नई दिल्ली: दिल्ली की अदालत ने उन्नाव बलात्कार मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 में महिला से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाते हुए शुक्रवार को कहा कि दोषी विधायक को बाकी बची उम्र जेल में काटनी होगी। जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने मामले में सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जो उसे एक महीने के अंदर जमा करना होगा। उम्रकैद की सजा सुनाये जाने के बाद सेंगर तीस हजारी जिला अदालत परिसर के अदालत कक्ष में रो पड़ा। उसकी बहन और बेटी भी साथ में रोते हुए दिखाई दिये। उसे सोमवार को मामले में दोषी ठहराये जाने के बाद भी रोते हुए देखा गया था। 

न्यायाधीश ने सेंगर को सजा सुनाने में नरम रवैया अख्तियार करने की अर्जी को खारिज करते हुए कहा, ‘‘इस अदालत को ऐसी कोई परिस्थिति नजर नहीं आती जो गंभीरता कम करती हो। सेंगर जनसेवक था और उसने जनता से विश्वासघात किया।’’ अदालत ने यह भी कहा कि 53 वर्षीय सेंगर का आचरण बलात्कार पीड़िता को धमकाने का था। साथ ही अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि बलात्कार पीड़िता को उनकी मां के लिए 10 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। अदालत ने सीबीआई को पीड़िता और उसके परिजनों की जान तथा सुरक्षा पर खतरे का आकलन हर तीन महीने में करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि वे एक साल तक दिल्ली महिला आयोग द्वारा उपलब्ध कराये गये किराये के घर में रहेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार को 15 हजार रुपये प्रति महीने किराया अदा करने का निर्देश भी दिया गया। अदालत ने सेंगर को भारतीय दंड संहिता (भादंसं) के तहत दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत किसी लोकसेवक द्वारा किसी बच्ची के खिलाफ यौन हमला किए जाने के अपराध का दोषी ठहराया था। अदालत ने कहा था कि पीड़िता का बयान एक शक्तिशाली व्यक्ति के खिलाफ ‘सच्चा और बेदाग’ है। पॉक्सो कानून में इसी साल अगस्त में संशोधन किया गया था जिसमें मृत्युदंड का प्रावधान है। यह घटना कानून संशोधित होने से पहले 2017 में घटने की वजह से मामले में यह प्रावधान लागू नहीं होता। 

मामले की सह-आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी करते हुए अदालत ने कहा था कि सीबीआई साबित नहीं कर सकी कि वह पीड़िता के यौन उत्पीड़न के मामले में सेंगर की साजिश में शामिल थी। ऐसा लगता है कि वह खुद भी परिस्थितियों की शिकार थी। पॉक्सो कानून के तहत सेंगर को दोषी करार देते हुए अदालत ने कहा था कि सीबीआई ने साबित किया कि पीड़िता नाबालिग थी और सेंगर पर इस कानून के तहत उचित तरीके से मुकदमा चलाया गया।

एक अलग मामले में इसी महिला के साथ 11 जून, 2017 को तीन अन्य लोगों ने उन्नाव में कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है। इस साल 28 जुलाई को बलात्कार पीड़िता की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गयी। हादसे में महिला की दो रिश्तेदारों की मौत हो गयी। इस मामले में महिला के परिवार ने साजिश का आरोप लगाया था।

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