नासिक: नासिक में आज से सबसे बड़े पवित्र स्नान कुंभ की शुरुआत हो गई है। नासिक में बड़ी संख्या में साधु और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस भव्य समारोह की शुरुआत अभी से कुछ देर पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुआ।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रकाश जावडेकर कुशावर्त घाट में स्नान करेंगे। इस घाट मैं करीब 13 अखाड़ो के नागा साधू और सन्यासी भी स्नान करेंगे।
ये घाट त्रिम्ब्केश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर है और चारो तरफ ब्रह्मगिरी और नीलगिरी पर्वत श्रृखला से घीरा है।
माना जा रहा है कि पहले दिन कुशावर्त घाट पर एक लाख से ज्यादा तीर्थयात्री गोदावरी नदी में डुबकी लगायेंगे।
वही नासिक के पंचवटी के रामकुंड में सुबह 6 बजे मुख्यमंत्री देवेन्द्र फद्नाविस और पालकमंत्री गिरिश महाजन शामिल होंगे।
यहाँ वैष्णव अखाड़े के साधू सन्यासी डूबकी लगायेंगे।
बसाया गया नया शहर साधुग्राम
सभी 13 अखाड़ों के लिए नई इमारत, 25 हजार गैस कनेक्शन, 39 हजार शौचालय, 714 एकड़ में 20 पार्किंग व्यवस्था 550 सीसीटीवी, 15 हजार जवान और 20 हजार वालंटियर्स सुरक्षा के लिए मौजुद रहेंगे।
शाही स्नान
शाही स्नान सैकड़ों साल से सन्तों के लिए मान-मर्यादा का प्रश्न रहा है। अखाड़ों से जुड़े सन्त-संन्यासियों के अलावा अन्य कोई शाही स्नान नहीं कर सकता और उसका हिस्सा भी नहीं बन सकता। कुंभ में संन्यासियों, बैरागियों, उदासीनों और निर्मलों के 13 अखाड़ों के संन्यासियों को शाही स्नान की योग्यता हासिल है।
चार शाही स्नान:
- 29 अगस्त नासिक
- 13 सितंबर नासिक व त्र्यंबकेश्वर
- 18 सितंबर नासिक
- 25 सितंबर त्र्यंबकेश्वर
कुंभ मेले का इतिहास
कुंभ मेले का इतिहास कम से कम 850 साल पुराना है। इस मेले के आयोजन को लेकर दो-तीन पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं जिनमें से सर्वाधिक मान्य कथा के अनुसार कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही हो गई थी। पृथ्वी पर जिन स्थानों पर इस भागदौड के दौरान आकाश से अमृत गिरा वहा प्रत्येक 12 वर्ष बाद कुम्भ पर्व मनाया जाता है। इस परस्पर मारकाट के दौरान पृथ्वी के चार स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक पर कलश से अमृत बूँदें गिरी थीं।
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नागा साधु क्यों नहीं पहनते हैं कपडे़?
कुंभ मेले के कवरेज में आपने कई बार देखा होगा कि नागा बाबा कपड़े नहीं पहनते हैं और पूरे शरीर पर राख लपेटकर घूमते हैं। उन्हे किसी की कोई शर्म या हया नहीं होती है वो उसी रूप में मस्त रहते हैं। नागा साधु हिन्दू धर्मावलम्बी साधु हैं जो कि नग्न रहने तथा युद्ध कला में माहिर होने के लिये प्रसिद्ध हैं। ये विभिन्न अखाड़ों में रहते हैं जिनकी परम्परा आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गयी थी।
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राम कुंड का इतिहास
राम कुंड गोदावरी नदी पर स्थित है, जो असंख्य तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां भक्त स्नान के लिए आते हैं। राम कुंड का निर्माण 1696 में चितारो खातरकर ने कराया था, जो 23 मी से 27 मी तक फैला हुआ है। किंवदंती है कि भगवान राम और उनकी पत्नी सीता ने वनवास के दौरान इस कुंड में स्नान किया था। मान्यता है कि इस पवित्र कुंड में किसी मृतक की अस्थियां बहाने से उसकी आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।
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जरुर करें त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन
बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाने वाले त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन जरुर करें। यह नासिक से 38 किलोमीटर दूर स्थित है। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल और ब्रह्मगिरी की खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में बने इस मंदिर में त्रिदेव के दर्शन होते हैं। यह मंदिर 270 वर्गफुट में फैला हुआ है। यहाँ स्वयंभू रूप में अंगूठे के आकार जितने बड़े तीन लिंग हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना गया है।
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मेले के लिए चली स्पेशल ट्रेन
रेलवे ने स्पेशल ट्रेन शुरु की है जोकि हावडा और नासिक रोड के बीच छह फेरों के लिए चलाई जाएगी। इस ट्रेन में दो एसएलआर, दो सामान्य एवं 10 स्लीपर, 04 एसी-तृतीय तथा एक एसी द्वितीय श्रेणी सहित कुल 19 कोच रहेंगे। सुबह पहुंचेगी रायपुर हावडा से चलने वाली स्पेशल ट्रेन शाम साढ़े छह बजे छूटेगी। रात 10 बजे टाटा नगर, सुबह 4.50 बजे बिलासपुर, 6.25 बजे रायपुर तथा सवा 11 बजे नागपुर होती हुई शाम करीब साढ़े सात बजे नासिक रोड पहुंचेगी।
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'परी' अखाड़े की पेशवाई, बदलेगा इतिहास कुंभ का
नासिक कुंभ इस बार 14 अखाड़ों की पेशवाई का गवाह बनेगा। सनातन धर्म के इतिहास में पहली बार यहां महिलाओं के अखाड़े की अलग से पेशवाई होगी। संन्यासनियों के परी अखाड़ा ने पेशवाई को लेकर प्रशासन की अनुमति मिलने का दावा किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के विरोध के बीच परी अखाड़ा से जुड़ी संन्यासिनें एवं भक्त पेशवाई की जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। परी अखाड़ा की पेशवाई 18 अगस्त को पंचवटी से निकलेगी।
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