नई दिल्ली: काजीरंगा नेशनल पार्क में सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत पर चिंतित राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने आज असम सरकार से एक सींग वाले गैंडे के क्षेत्र से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर यातायात गतिविधियों के कारण हताहत जीवों की सटीक संख्या मुहैया कराने को कहा है।
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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सर्वानंद सोनोवाल सरकार को इन मौतों को रोकने के लिए सेंसर संचालित स्वचालित यातायात बैरियर लगाने में प्रगति से अवगत कराने को कहा।
राज्य सरकार और काजीरंगा नेशनल पार्क के निदेशक को बताने को कहा गया कि राजमार्ग के करीब वाहनों की गतिविधियों के कारण कितने प्राणियों की मौत हुई। पीठ ने कहा, राज्य के लिए पेश हो रहे वकील को हमारे समक्ष मूल रिकार्ड पेश कर दिखाना होगा कि अधिकरण के पूर्व के आदेशों को लेकर प्राणी संघर्ष रोकने के लिए सेंसर बैरियर लगाने को लेकर क्या कदम उठाया गया।
वन्य जीवों की बढ़ती मौतों पर रोक लगाने के प्रावधानों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के मुद्दे पर एनजीटी ने कहा कि भारत वन्यजीव संस्थान, देहरादून के साथ मशविरा कर दस्तावेज तैयार होना चाहिए।
अधिकरण का निर्देश पर्यावरणविद रोहित चौधरी की ओर से दाखिल की गयी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें जखालाबंदा से बोकाकहाट तक काजीरंगा पार्क के भीतर से गुजरने वाले एनएच 37 के विस्तार का विरोध किया गया। सुनवाई की अंतिम तारीख पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पीठ को बताया था कि राज्य सरकार द्वारा तैयार डीपीआर मंजूर कर लिया गया है।