
क्या है ऐवलान्च?
हिमालय की ऊंची-ऊंची और बर्फीली चोटियों में ऐसे एवलान्च आम बात हैं। सर्दियों हिमालय की ऊंची चोटियों पर ज्यादा बर्फ जम जाती है। ये बर्फ परत दर परत जमती है और बहुत ज्यादा दबाव बढ़ने की वजह से ये परतें खिसक जाती हैं। तेज रफ्तार के साथ नीचे की ओर बहने लगती हैं और इनके रास्ते में जो कुछ भी आता है उसे अपने साथ ले जाती हैं। शांत बर्फीले पहाड़ों पर हल्की सी हलचल या सिर्फ एक गोली की आवाज़ भी बर्फ की परतों को हिलाने के लिए काफी होती है। ऐसे में सरहद की हिफाज़त के लिए तैनात इन बहादुर जवानों के लिए ये बर्फ काल बन जाती है।
जानकारों का मानना है कि 10 जवानों के एवलांच में दबे होने की घटना से पहले शायद पेट्रोलिंग के लिए उनकी मूवमेंट का ध्यान नहीं रखा गया। ऊंचे हिमालयी इलाकों में आम तौर पर एवलांच सुबह के वक्त ही आते हैं जब सूरज निकल रहा होता है। हल्का से टेंपरेचर बढ़ता है और बर्फ की परतें खिसकने लगती हैं। सियाचिन में भी एवलांच से हादसा सुबह के वक्त ही हुआ ऐसे में जांच का विषय ये है कि क्या इन दस जवानों की मूवमेंट के लिए टाइमिंग का ख्याल नहीं रखा गया था?
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