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RAJAT SHARMA BLOG: पीएनबी घोटाले से पब्लिक सेक्टर बैंकिंग व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई है

आम आदमी यह सवाल पूछ रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बड़े-बड़े कारोबारियों को तीन दिन में भ्रष्ट अधिकारयों की मदद से 280 करोड़ का लोन कैसे मिल जाता है?

Rajat Sharma Rajat Sharma
Updated on: February 20, 2018 23:28 IST
Rajat Sharma- India TV Hindi
Rajat Sharma

नीरव मोदी धोखाधड़ी मामले में सीबीआई द्वारा सोमवार को पंजाब नेशनल बैंक के तीन सीनियर अधिकारियों बेच्चू तिवारी, चीफ मैनेजर (फॉरेक्स डिपार्टमेंट के प्रभारी), यशवंत जोशी (फॉरेक्स डिपार्टमेंट मैनेजर), और प्रफुल्ल सावंत (एक्सपोर्ट ऑफिसर) की गिरफ्तारी बैंकिंग व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर एक इशारा है। कुछ गिने-चुने अधिकारियों ने रिश्वत लेकर बैंक से 11,400 करोड़ रुपये निकालने में नीरव मोदी की मदद की, जो कि भनक लगते ही अपने परिवार के साथ भारत से भाग चुका है। 

 
अपने शो 'आज की बात' में मैंने दिखाया कि कैसे नीरव मोदी की कंपनियों के पक्ष में तीन दिनों के अंदर 280 करोड़ के लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) जारी किए गए। यह धोखाधड़ी बैंक में पिछले सात साल से चल रही थी। 2011 से 2017 के बीच 6000 करोड़ से ज्यादा के 150 LOU जारी हुए, जबकि अप्रैल 2017 के बाद से करीब 3500 करोड़ के 143 LOU जारी किए गए।
 
सोमवार को इनकम टैक्स की शुरुआती रिपोर्ट सामने आई जिसमें 515 करोड़ रुपए के शुरुआती लेनदेन की ट्रेल पक़ड़ में आ गई। पता ये भी चला कि ज्वैलरी के नाम पर फर्जी सेल्स भी दिखाई गईं। पहली बार इस केस में नीरव मोदी की बहन पूर्वी का नाम भी बेनिफिशयरी के तौर पर सामने आया जो कि हांगकांग में रह रही है।
 
अब आम लोगों के मन में बैंकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अगर आम आदमी घर, कार या बिजनस के लिए लोन लेने जाए तो बैंकों के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। तमाम तरह के दस्तावेज मांगे जाते हैं तब कहीं जाकर लोन मिलता है। अगर लोन की एक किश्त देने में देरी हो जाए तो बैंक वाले फोन करने लगते हैं कई बार धमकियां मिलती हैं। लेकिन इस मामले में अधिकारियों के एक गिरोह ने बिजनेसमैन के साथ मिलकर संदिग्ध लेनदेन पर आधारित फर्म को 11,400 करोड़ का लोन दे दिया।
 
आम आदमी यह सवाल पूछ रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बड़े-बड़े कारोबारियों को तीन दिन में भ्रष्ट अधिकारयों की मदद से 280 करोड़ का लोन कैसे मिल जाता है?
 
जो दस्तावेज मैंने अपने शो में दिखाए उससे एक बात तो स्पष्ट है कि सरकार हमेशा चाहती है कि जो लोग कारोबार करते हैं, उन्हें पैसे की दिक्कत न हो। बिजनेस बढ़ेगा तो लोगों को रोजगार मिलेगा। अगर पैसे की दिक्कत होगी तो बिजनस ठप हो जाएगा और इससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए सरकार कारोबारियों की मदद करती है ताकि बिजनस सुचारू रूप से चलता रहे। धोखाधड़ी रोकने के लिए चेक एंड बैलेस का भी पुख्ता सिस्टम है। लेकिन कहावत है कि जब बाड़ ही खेत को खाने लगे और मांझी नाव को डुबोने लगे तो फिर इसे कौन बचाएगा।
  
नीरव मोदी के मामले में ठीक ऐसा ही हुआ। सिस्टम सही था, सिस्टम में बैठे लोग गड़बड़ कर रहे थे। पैसे लेकर बैंक के अफसर नीरव मोदी से मिल गए। सारे पासवर्ड उसे दे दिए गए। उसके लिए धड़ल्ले से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी किए गए और इसे पूरे सिस्टम पर कहीं आने नहीं दिया। इसलिए यह चोरी तुरंत पकड़ में नहीं आई। और जब तक यह धोखाधड़ी पकड़ में आई तब तक नीरव और उसका परिवार बैंक में जमा आम आदमी की गाढ़ी कमाई के 11,400 करोड़ रुपये की रकम डकारने के बाद देश छोड़कर भाग चुका था। (रजत शर्मा)

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