नई दिल्ली: राजधानी, शताब्दी व दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों में'फ्लेक्सी किराया' लागू करने को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रही केंद्र सरकार अपनी इस पहल को वापस ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र के इस कदम के खिलाफ विपक्ष ही नहीं, बल्कि पार्टी से भी बगावती सुर उठे हैं।
सूत्रों ने कहा कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने यह फैसला रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के विरोध के वावजूद लिया। सिन्हा ने कहा था कि इसका असर मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जिसका खामियाजा बीजेपी को अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। लेकिन प्रभु ने सिन्हा के विरोध को खारिज कर दिया। इसके बाद सिन्हा ने यह मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और भाजपा अध्यक्ष के समक्ष उठाया, और उन्हें समझाने में कामयाब रहे।
सिन्हा ने तर्क दिया कि रेलवे के वाणिज्यिक लाभ के लिए भाजपा अपना राजनीतिक नुकसान नहीं सह सकती, क्योंकि इस फैसले से मध्यम वर्ग तथा कम आय कमाने वाला एक बड़ा तबका नाराज है, जो यात्रा के लिए हवाई जहाज नहीं, रेल पर निर्भर है।
सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि इसके बाद अमित शाह ने इस विवादित कदम के नफे-नुकसान के बारे में प्रभु से बातचीत की। प्रभु ने दावा किया कि इस फैसले से रेलवे को 500 करोड़ रुपये का लाभ होगा। प्रभु का यह फैसला शुक्रवार से ही प्रभाव में आ गया।
शाह ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि 500 करोड़ रुपये के लिए भाजपा मध्यम वर्ग की नाराजगी का जोखिम मोल नहीं ले सकती, वह भी ऐसे वक्त जब पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजधानी, शताब्दी तथा दूरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया नौ सितंबर से ही लागू हो गया है, जिसकी घोषणा बुधवार को की गई थी। रेलवे की ओर से इस फैसले को अभी 'प्रायोगिक तौर पर' लागू करने की बात कही गई है।