नई दिल्ली: केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने शुक्रवार को कहा कि रेलवे को आईसीयू से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही रही है और ऐसी स्थिति तैयार करने की कोशिश हो रही है जहां वह सांस ले सके। उन्होंने कहा, रेलवे गंभीर संकट में थी, अभी ही नहीं बल्कि 20-30 साल से। राकेश मोहन समिति ने यही बात कही थी। इसलिए अब हम ऐसी स्थिति तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं जहां रेलवे सांस ले पाएगी।
यह पूछने पर कि क्या रेलवे अभी भी आईसीयू में है, उन्होंने कहा, हम इसे आईसीयू से निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इसे सशक्त मनाने के संबंध में प्रभु ने कहा, जिंदा रहने के लिए रेलवे को अपने परिचालन में सुधार की जरूरत है। हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि रेल अगले कुछ साल में वृद्धि का प्रेरक बने। हम इसके लिए हर तरह का प्रयास कर रहे हैं।
ढुलाई में गिरावट के बीच रेलवे के संबंध में रणनीति के बारे में पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में 1.2 अरब टन माल ढुलाई क्षमता तैयार करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, माल ढुलाई का घटना हमारे हाथ में नहीं है। यह मुख्य क्षेत्रों की वृद्धि पर निर्भर है। जब मुख्य क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज होगी तो माल ढुलाई भी बढ़ेगी। लेकिन हम 1.2 अरब टन माल ढुलाई के लिए तैयार हैं। रेलवे के इतिहास में पहली बार हमने ऐसी ढुलाई क्षमता तैयार करना चाहते हैं जो मांग से पहले तैयार है। इसलिए अब माल आना बाकी है।
भारत में पहली बुलेट ट्रेन 2023 तक दौड़ने लगेगी
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को कहा कि भारत में पहली बुलेट ट्रेन 2023 में दौड़ने लगेगी जिससे इस उपमहाद्वीप में ट्रेन परिचालन के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात होगा। प्रभु ने बताया, वर्ष 2023 में पहली बुलेट ट्रेन भारत में दौड़ने लगेगी। हम पहले ही बुलेट ट्रेन परियोजना के चरणों पर चर्चा कर चुके हैं। इस बुलेट ट्रेन के मुंबई और अहमदाबाद के बीच की 508 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में पूरी करने की संभावना है। इसकी सामान्य गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी, जबकि अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि काम नियम के मुताबिक चल रहा है। देश की पहली बुलेट ट्रेन पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा करते समय लोग समुद्र के नीचे रेल यात्रा कर रोमांचित हो उठेंगे। 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल गलियारे में समुद्र के नीचे 21 किलोमीटर की सुरंग होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 97,636 करोड़ रुपए है जिसके 81 प्रतिशत हिस्से का वित्त पोषण जापान से कर्ज लेकर किया जाएगा। जापान के साथ ऋण समझौता इस साल के अंत तक किए जाने की संभावना है और निर्माण कार्य 2018 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।