नयी दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने कथित हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी को श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया। वानी को कश्मीरी अलगाववादी शब्बीर शाह के खिलाफ चल रहे करीब एक दशक पुराने मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। श्रीनगर से यहां लाये जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने उसे 14 अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य की पुलिस की मदद से वानी (36) को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। ये भी पढ़ें: नौकरीपेशा लोगों के लिए खुशखबरी, सरकार जल्द ही ले सकती है यह बड़ा फैसला
ईडी ने हाल ही में दिल्ली की एक अदालत से उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल किया था। एजेंसी ने इस मामले में उसकी पेशी के लिए कई समन जारी किए थे लेकिन वह कभी पेश नहीं हुआ। उन्होंने कहा, वारंट की तामील कर दी गई है और अब जांच को आगे बढ़ाने के लिए वानी का सामना शाह तथा अन्य से कराया जाएगा। एजेंसी ने इसी मामले में कल शाह की पत्नी बिलकीस से भी पूछताछ की थी। उन्हें इस हफ्ते एक बार फिर बुलाया गया है और कुछ विाीय दस्तावेज जमा करने को कहा गया है।
शाह को भी एजेंसी ने इसी तरह 26 जुलाई को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। इस समय वह ईडी की हिरासत में है। इन दोनों के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई दरअसल अगस्त 2005 के उस मामले के सिलसिले में है, जहां दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने वानी को गिरफ्तार किया था। वानी ने शाह को सवा दो करोड़ रूपए पहुंचाने का दावा किया था। वर्ष 2010 में दिल्ली की एक अदालत ने वानी को आतंक के वित्तपोषण के आरोपों से तो बरी कर दिया था लेकिन उसे आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया था।
ईडी ने धन शोधन रोकथाम कानून के तहत शाह और वानी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। वानी को 26 अगस्त 2005 को कथित तौर पर 63 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार किया गया था, जो पश्चिम एशिया स्थित हवाला माध्यमों से आया था। इसके अलावा उसके पास से कथित तौर पर भारी मात्रा में बारूद बरामद किया गया था।
पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि 50 लाख रुपए शाह को और 10 लाख रुपए श्रीनगर में जैश ए मुहम्मद के एरिया कमांडर अबू बकर को दिए जाने थे और बाकी राशि उसके पास थी। वानी ने यह भी कहा कि उसने पिछले वर्षों में शाह और उसके संबंधियों को कई किश्तों में लगभग सवा दो करोड़ रुपए दिए। सूत्रों ने कहा कि ईडी इस मामले में कथित आतंक विापोषण के अपराध से हुए लाभों की जांच करना चाहती है।
गिलानी खानदान के पास है 150 करोड़ की दौलत
कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस (गिलानी) के शीर्ष सात नेताओं द्वारा आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने के मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रहा है। एनआईए ने संगठन के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी और उनके परिजनों की 14 कथित संपत्तियों को चिह्नित किया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 100 करोड़ से 150 करोड़ रुपये के बीच बतायी जा रही है।
रिपोर्ट में दावा किया है कि उसके पास मौजूद एनआईए की लिस्ट में शामिल इन संपत्तियों को हवाला और बेनामी संपत्ति मामले में जांच की जा रही है। इन संपत्तियों में शैक्षणिक संस्थान, आवासीय इमारतें, कश्मीर में खेती की जमीन और दिल्ली स्थिति फ्लैट शामिल हैं। ये संपत्तियां कथित तौर पर गिलानी, उनके दो बेटों नसीम और नईम, बेटी अनीशा, फरहत, जमशिदा, चमशिदा के नाम हैं। अनीशा और फरहत गिलानी की दूसरी पत्नी की बेटियां हैं।