भोपाल: भोपाल में शौर्य स्मारक का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में सैनिकों की वीरता पर कवियों और उनकी कविताओं की जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने माखनलाल चतुर्वेदी और रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं की कुछ पंक्तियां मंच से पढ़कर लोगों को सुनाई।
सबसे पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी की कविता "पुष्प की अभिलाषा" का जिक्र किया। इस कविता में फूल की अंतिम अभिलाषा को कवि अपने शब्दों में कुछ इस प्रकार व्यक्त करता है। मुझे तोड़ लेना वनमाली... उस पथ पर देना तुम फेंक... मातृभूमि पर शीश चढ़ाने.. जिस पथ जाएं वीर अनेक....
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