
Ramdhari Singh Dinkar poem
माखनलाल चतुर्वेदी की कविता "पुष्प की अभिलाषा" को पढ़ने के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जिक्र किया। राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी पंक्तियों से सैनिकों की वीरता का अद्भुत वर्णन किया है। "कलम आज उनकी जय बोल" कविता में दिनकर ने वीर सैनिकों के बलिदान को कुछ इस प्रकार व्यक्त किया है।
कलम आज उनकी जय बोल.. जला अस्थियां बारी-बारी.. चटकाई जिनमें चिंगारी.. जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर.. लिए बिना गर्दन का मोल.. कलम, आज उनकी जय बोल।