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जानिए कौन हैं निहंग सिख, सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या के बाद से हो रही है चर्चा

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Oct 15, 2021 04:59 pm IST,  Updated : Oct 15, 2021 04:59 pm IST

निहंगों की संख्या आज भले ही सीमित हो, लेकिन वे सिख धर्म में एक विशेष स्थान रखते हैं।

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निहंग सिख दस गुरुओं के आदेशों का पूरी तरह पालन करते हैं और इनका जीवन धर्म को ही समर्पित होता है। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

नई दिल्ली: हरियाणा में सोनीपत जिले के कुंडली में किसानों के प्रदर्शन स्थल के पास शुक्रवार को एक अज्ञात व्यक्ति का शव धातु के एक अवरोधक से बंधा हुआ मिला। शव का एक हाथ कटा हुआ था। पुलिस ने बताया कि मृतक लखबीर सिंह को पंजाब के तरण तारण का एक मजदूर बताया गया है और उसकी आयु 35 वर्ष के आसपास है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में कुछ निहंगों को जमीन पर खून से लथपथ पड़े एक व्यक्ति के पास खड़े हुए देखा गया है और उसका बायां हाथ कटा हुआ पड़ा है।

‘गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए दी गई सजा’

निहंगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मृतक को सिखों की पवित्र किताब गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए सजा दी गई है। वीडियो क्लिप में दिख रहा है कि निहंग उस व्यक्ति से पूछ रहे हैं कि वह कहां से आया है। व्यक्ति को मरने से पहले पंजाबी में कुछ कहते हुए और निहंगों से माफ करने की गुहार लगाते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में दिखाई देता है कि निहंग लगातार उससे पूछ रहे हैं कि बेअदबी करने के लिए किसने उसे भेजा था। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद निहंग सिख चर्चा में आ गए हैं।

कौन हैं निहंग सिख? कहां से शुरू होता है इनका इतिहास?
निहंग पुराने सिख योद्धाओं से निकला एक समूह है। माना जाता है कि जब 1699 में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने खालसा की स्थापना की थी तो उसके साथ ही निहंग सिखों की भी उत्पत्ति हुई। ये सिख वैरागियों या तपस्वियों की तरह जीवन-यापन करते हैं, छावनियों में रहते हैं और धर्म की रक्षा के लिए तैनात रहते हैं। निहंग सिख दस गुरुओं के आदेशों का पूरी तरह पालन करते हैं और इनका जीवन धर्म को ही समर्पित होता है। ये हमेशा नीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं और सिर पर ऊंची पगड़ी पहनते हैं। हम निहंग सिखों को उनके बाणे (नीले वेश और पगड़ी) के कारण आसानी से पहचान सकते हैं।

क्यों विवादों में है ‘गुरु की लाडली फौज’?
निहंगों की संख्या आज भले ही सीमित हो, लेकिन वे सिख धर्म में एक विशेष स्थान रखते हैं। फिलहाल इनके लगभग एक दर्जन जत्थे हैं और हर जत्थे का नेतृत्व एक जत्थेदार करता है। निहंगों ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में मुगल और अफगान घुसपैठ का मुकाबला किया था। इसके साथ ही अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली का निहंगों ने जमकर सामना किया था। 1818 में महाराजा रणजीत सिंह के सरकार-ए-खालसा बनने श्रेय काफी हद तक निहंग योद्धाओं को जाता है। 1849 में ब्रिटिश साम्राज्य के वक्त में सरकार-ए-खालसा के पतन ने निहंगों के प्रभाव को भी कम कर दिया था। सिख धर्म के प्रति इनके समर्पण के चलते इन्हें 'गुरु की लाडली फौज' भी कहा जाता है।

हाल में क्यों चर्चा में रहे हैं निहंग सिख?
हालांकि पिछले कुछ समय से निहंग सिख गलत वजहों के चलते चर्चा में रहे हैं। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में पंजाब के पटियाला में सब्जी मंडी के बाहर कर्फ्यू पास मांगने पर भड़के कुछ निहंग सिखों ने पुलिस पर तलवारों से हमला कर एक एएसआई के बाएं हाथ को कलाई से ही काट कर अलग कर दिया था। बाद में पुलिस ने एनकाउंटर में 2 निहंग सिखों को मार गिराया था। गुरुवार को कुंडली बॉर्डर पर हुई हत्या को लेकर भी निहंग सिखों पर आरोप लग रहे हैं।

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