नई दिल्ली: विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के NGO इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली संस्था राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) को कथित तौर पर दिए गए 50 लाख रूपए के चंदे पर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।
केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी ने विपक्षी पार्टी पर आरोप लगाया कि IRF की ओर से RGF को 50 लाख रूपए का कथित चंदा दरअसल एक रिश्वत थी ताकि नाइक की देश-विरोधी गतिविधियों को ढंका जा सके। बीजेपी के आरोप पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को बदनाम करने के लिए और उसकी छवि धूमिल करने के लिए कीचड़ उछालने की जहरीली साजिश रच रही है।
कांग्रेस ने दावा किया कि जब IRF के बारे में तथ्यों का पता लगा था तो उसे चंदे के पैसे वापस कर दिए गए थे । विपक्षी कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछली संप्रग सरकार में रहे निहित स्वार्थ वाले तत्वों पर नाइक को बचाने का आरोप लगाया।
उन्होंने 2012 में लोकसभा में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की ओर से दिए गए कथित जवाब दिखाते हुए यह आरोप लगाया। तिवारी ने कथित तौर पर अपने जवाब में नाइक के पीस टीवी को ऐसे 24 अवैध विदेशी चैनलों में से एक बताया था जिनकी विषय-वस्तु भारत के सुरक्षा परिदृश्य के अनुकूल नहीं है ।
प्रसाद ने कांग्रेस से सवाल किया कि 2011 में उसने आईआरएफ की ओर से दिया गया चंदा क्यों नहीं लौटाया जब उसी की सरकार ने नाइक के टीवी चैनल को लेकर सुरक्षा चिंताएं जाहिर की थी ।