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दिल्ली में महिला वकील पर पति का जानलेवा हमला, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, कहा- दोषी बचना नहीं चाहिए

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Apr 27, 2026 01:15 pm IST,  Updated : Apr 27, 2026 01:17 pm IST

पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि उनके पति ने उन पर चाकू से हमला किया और इलाज के लिए तीन अस्पतालों में जाने के बावजूद उन्हें तत्काल उपचार नहीं मिला। आखिर में एम्स में भर्ती कराया गया।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

दिल्ली के कड़कड़डूमा क्षेत्र में एक महिला वकील पर हुए चाकू हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीड़ित महिला वकील ने अदालत को बताया कि उनके पति ने उन पर बेरहमी से चाकू से हमला किया। उन्होंने तुरंत पीसीआर और अपने भाई को सूचना दी और इलाज के लिए तीन अलग-अलग अस्पतालों में गईं, लेकिन सभी अस्पतालों ने मामले को गंभीर बताते हुए उनका इलाज करने से इनकार कर दिया। इस दौरान उनके ससुराल पक्ष के लोग फरार बताए गए।

आरोपी को किया गया गिरफ्तार

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इसी वजह से शिकायत मिलते ही अदालत ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को जानकारी दी कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।

पुलिस ने दर्ज की FIR

बताया गया कि पीड़िता का इलाज पहले एम्स में किया गया, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।

पीड़िता को नहीं मिली तत्काल चिकित्सा सुविधा

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने अस्पतालों द्वारा आपातकालीन उपचार देने से इनकार करने पर गंभीर सवाल उठाए और पूछा कि आखिर क्यों पीड़िता को तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई।

आरोपी ने पीड़िता घर के बाहर छोड़ा

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि महिला की तीन बेटियां हैं, जिनकी उम्र 12 साल, 4 साल और 1 साल है। अदालत की मदद कर रहे वकील ने बताया कि हमले के बाद ससुराल वाले दो छोटी बच्चियों को अपने साथ ले गए और उनका अभी तक कोई पता नहीं है। वहीं बड़ी बेटी को आरोपी पति ने रात में घर के बाहर छोड़ दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने ढूंढ लिया। अभी वह अपनी नानी-नाना के पास है।

पुलिस के सीनियर अधिकारी को सौंपी जाए जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। इसके लिए कोर्ट ने कुछ अहम आदेश दिए। दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कहा गया है कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए, बेहतर हो कि यह जांच किसी महिला अधिकारी (ACP या DCP स्तर) को दी जाए। पुलिस को तुरंत दो लापता बच्चियों का पता लगाने का आदेश दिया गया है। बड़ी बेटी फिलहाल नानी-नाना के पास ही रहेगी।

पहले तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से किया मना

कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि घायल महिला को पहले तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। एक अस्पताल ने सिर्फ प्राथमिक इलाज दिया, इसके बाद सुबह करीब 6 बजे उसे AIIMS में भर्ती कराया गया। कोर्ट ने पुलिस को इस पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।

पीड़िता को दी जाए आर्थिक मदद

महिला की हालत और उसकी आर्थिक परेशानी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) को निर्देश दिया है कि पीड़िता को तुरंत अंतरिम आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वह अपना इलाज करा सके और अपनी बेटियों की देखभाल कर सके। सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस ने महिला के जल्द ठीक होने की कामना की।

कोर्ट ने पीड़िता को बताया बहादुर महिला

पीड़िता ने अदालत को यह भी बताया कि उनके दो नाबालिग बच्चे पति के परिवार के पास हैं, जबकि एक बच्चा उनके माता-पिता के साथ है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में उन्हें घर से बाहर छोड़ दिया गया, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। मुख्य न्यायाधीश ने पीड़िता को एक बहादुर महिला बताते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले अपने स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान देना चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस हमले की कड़ी निंदा की थी।

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