EC Press Conference: चुनाव में धांधली और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग रविवार (17 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ने राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं के आरोपों के जवाब दिए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, इलेक्शन कमिश्नर डॉक्टर विवेक जोशी, इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधु, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संजय कुमार, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मंगेश गर्ग, डायरेक्ट जनरल आशीष गोयल और डिप्टी डायरेक्टर जनरल विजय कुमार पांडे शामिल थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी को सात दिन का समय देते हुए आरोपों पर सबूत मांगे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 7 दिन के अंदर हलफनामा दें या देश से माफी मांगें। ऐसा नहीं करने पर उनके सभी आरोपों को निराधार माना जाएगा।
अखिलेश यादव और बीजेडी की तरफ से कहा गया कि उन्होंने हलफनामा देकर शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत का समाधान नहीं हुआ। इस पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव हारने के बाद पत्र लिखकर मतदाता सूची पर सवाल उठाना उचित नहीं है। हलफनामा देने की बात गलत है। इस मामले में जवाब जिला स्तर पर विचाराधीन है। समय से पहले इस पर बात करना त्रुटिपूर्ण हो सकता है और नियमों के खिलाफ भी होगा।
चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि राहुल गांधी सात दिन के अंदर हलफनामा दें या देश से माफी मांगें। ऐसा नहीं करने पर उनके सभी आरोपों को निराधार माना जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि एक सितंबर तक सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में गलतियां बताएं। इसमें सुधार किया जाएगा। अभी भी सभी राजनीतिक दलों के पास 15 दिन का समय है, जिसमें वह मतदाता सूची में सुधार करने में अपना योगदान दे सकते हैं। 1 सितंबर के बाद इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा।
राहुल गांधी से शपथ पत्र मांगे जाने के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि नियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति जो उस विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं है, उसे तय अवधि (45 दिन) के बाद शिकायत करनी है तो उसे संबंधित अधिकारी के साथ शपथ पत्र देना होता है।
बिहार चुनाव से पहले हड़बड़ी में SIR कराने के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार की जरूरत चुनाव से पहले होती है, न की चुनाव के बाद। ऐसा वह नहीं कह रहे हैं। ऐसा राजनीतिक दलों के नेता कह रहे हैं। बिहार में बाढ़ जैसी चुनौतियों के बावजूद सभी लोगों के फॉर्म वापस आ चुके हैं।
मशीन रीडेबल सूची न अपलोड किए जाने के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्वीकार किया था कि मशीन रीडेबल लिस्ट से मतदाता की निजता का हनन होता है। इसी वजह से इसे हटाया गया है और 2019 से ही ऐसा चला आ रहा है।
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सवाल पूछे जाने पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नर मिलकर यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल या अन्य राज्यों में SIR कब होना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भले ही चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग देश के हर मतदाता के साथ खड़ा है। चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। इसमें चोरी की गुंजाइश नहीं है। मतदान खत्म होने के 45 दिन तक किसी पार्टी ने आपत्ति नहीं जताई, लेकिन अब ऐसे निराधार आरोपों का मकसद देश की जनता समझती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में एसआईआर की शुरुआत हो चुकी है। 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने एक मसौदा सूची तैयार की है। चूंकि यह मसौदा सूची हर बूथ पर तैयार की जा रही थी, इसलिए सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों ने अपने हस्ताक्षरों से इसे सत्यापित किया। मतदाताओं ने कुल 28,370 दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की हैं। जब इतने सारे लोग किसी प्रक्रिया में शामिल हैं तो वोट की चोरी कैसे संभव है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि एसआईआर के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। जिस मतदाता सूची को सभी राजनीतिक दल के बीएलओ सत्यापित करते हैं, उसी सूची में राष्ट्रीय स्तर के नेता सवाल उठाते हैं। शायद स्थानीय बीएलओ की बातें शीर्ष नेताओं तक नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में वोट चोरी जैसे शब्दों का प्रयोग कर संविधान का अपमान किया जा रहा है। मतदाताओं की निजता का हनन किया जा रहा है।
चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार की प्रारूप मतदाता सूची में सुधार के लिए सभी अपना योगदान दे रहे हैं। जुलाई में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं ने भी मतदाता बनने के लिए आवेदन किया है। प्रारूप मतदाता सूची में सुधार के लिए अभी भी 15 दिन का समय बचा है। ऐसे में सभी लोगों से इसमें सुधार में योगदान देने की अपेक्षा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि 18 साल की उम्र पूरी करने वाले हर व्यक्ति को मतदाता सूची का हिस्सा जरूर बनना चाहिए और मतदान जरूर करना चाहिए। चुनाव आयोग के लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है, उसके लिए सभी समकक्ष हैं। पिछले दो दशकों से सभी राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची में सुधार की मांग की है। इसी वजह से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई है।
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हो चुकी है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग के सात अधिकारी शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि राजनीतिक दल मतदाता सूची बनाने के हर चरण में शामिल हैं।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। राहुल के अनुसार बीजेपी नेताओं के कहने पर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की। फर्जी वोटर बनाए गए, जिनका मत बीजेपी को गया और इस आधार पर बीजेपी ने चुनाव जीते हैं। विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा चुनाव 2024 के अलावा कई विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस दोपहर तीन बजे शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग के अधिकारी जबाव देंगे।
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