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पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की तबीयत बिगड़ी, हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती, जानें अब कैसी है हालत

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Oct 07, 2025 06:22 pm IST,  Updated : Oct 07, 2025 06:53 pm IST

देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाना पड़ा है। हॉस्पिटल की ओर से उनकी सेहत को लेकर अपडेट भी जारी किया गया है।

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पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा Image Source : PTI/FILE

नई दिल्ली: देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें संक्रमण के बाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। 

हॉस्पिटल का सामने आया बयान

मणिपाल हॉस्पिटल ने एक बुलेटिन में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को संक्रमण के कारण ओल्ड एयरपोर्ट रोड स्थित मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वर्तमान में उनका चिकित्सा प्रबंधन चल रहा है और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम उनकी प्रगति पर नजर रख रही है।"

कब थे भारत के प्रधानमंत्री? 

हरदानहल्ली डोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा 1 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। 1994 से 1996 तक वह कर्नाटक के 14वें मुख्यमंत्री भी रहे। वर्तमान में वह जनता दल (सेक्युलर) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

गौरतलब है कि एचडी देवेगौड़ा 92 साल के हैं। उनका जन्म 18 मई 1933 को हुआ था। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी तबीयत बिगड़ने से उनके समर्थक चिंतित हैं। 

पीएम के रूप में किए कई बड़े काम

प्रधानमंत्री के रूप में देवेगौड़ा ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया, विशेष रूप से ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया और सपनों का बजट (1996-97) प्रस्तुत किया, जिसमें किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई योजनाएं थीं। वे अभी भी जनता दल (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय हैं। उनके बेटे, एच.डी. कुमारस्वामी, भी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। देवेगौड़ा को उनकी सादगी, किसान हितों के प्रति समर्पण और क्षेत्रीय राजनीति में गहरी पकड़ के लिए जाना जाता है।

देवेगौड़ा संयुक्त मोर्चा गठबंधन के नेता के रूप में प्रधानमंत्री बने, जिसमें कई क्षेत्रीय दलों और वामपंथी पार्टियों का समर्थन था। उनकी सरकार को बाहर से कांग्रेस पार्टी का समर्थन प्राप्त था। उनका कार्यकाल हालांकि छोटा रहा, लेकिन कई महत्वपूर्ण नीतियों और निर्णयों के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री के रूप में (1994-1996), उन्होंने कर्नाटक में सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण विकास पर ध्यान दिया। बेंगलुरु को भारत के आईटी हब के रूप में विकसित करने में भी उनकी नीतियों का योगदान रहा।

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