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हर मिनट में बने 21 शौचालय, 2 अक्टूबर 2014 से भारत में अब तक कुल कितनी हुई इनकी संख्या?

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 19, 2025 12:58 pm IST,  Updated : Nov 19, 2025 12:58 pm IST

प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को 11 साल हो चुके हैं। इस आर्टिकल में पढ़ें कि इस मिशन ने कैसे भारत की स्वच्छता और सेहत में उल्लेखनीय तरीके से बदलाव लाया।

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत कितने टॉयलेट बने? Image Source : @SWACHHBHARATGOV/TWITTER

नई दिल्ली: साल 2014 में सरकार में आने के बाद PM मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान जोर-शोर से चलाया था। 11 साल पहले इस मिशन को महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर, 2014 को लॉन्च किया गया था। स्वच्छ भारत मिशन की वजह से PM मोदी के 11 साल के कार्यकाल में देश की साफ-सफाई में उल्लेखनीय तरीके से परिवर्तन आया है। इस मिशन का मकसद खुले में शौच की समस्या को खत्म करना, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना और नागरिकों, खासतौर पर महिलाओं और ग्रामीण गरीबों, के सम्मान और सेहत को बनाए रखना था। इस आर्टिकल में जानें स्वच्छ भारत मिशन ने कैसे भारत की तस्वीर को बदला?

भारत ने कैसे हासिल किया ODF का लक्ष्य?

फेज-1 के तहत, भारत ने साल 2019 तक ग्रामीण इलाकों में 100 फीसदी स्वच्छता कवरेज हासिल कर ली थी, जिसमें 10 करोड़ से ज्यादा व्यक्तिगत घरेलू शौचालय यानी Individual Household Latrine का निर्माण हुआ। इसके बाद सभी गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त यानी ODF घोषित किया। ODF का मतलब Open Defecation Free है।

अपशिष्ट प्रबंधन पर क्या-क्या काम हुए?

इसके बाद, फेज-2, अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया। बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन यानी SLWM के जरिए खुले में ODF स्थिति को बनाए रखने और ओडीएफ प्लस पाने पर फोकस किया गया। 17 मार्च, 2025 तक, 5 लाख 86 हजार गांवों में से 5.64 लाख से ज्यादा गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया। इनमें 1 लाख 12 हजार आकांक्षी, 7 हजार 337 राइजिंग और 4 लाख 44 हजार आदर्श गांव शामिल हैं। वहीं, 5 लाख 3 हजार गांवों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लागू किया।

हर मिनट में कैसे बने 21 टॉयलेट?

अगर ये बात करें कि पिछले 11 साल में कुल कितने टॉयलेट बने तो इसका जवाब है 12 करोड़। इसके अलावा, 2 लाख 53 हजार पब्लिक टॉयलेट भी बनाए गए। 11 साल में 12 करोड़ टॉयलेट बनने का गणित लगाएं तो सामने आता है कि इस हिसाब से भारत में हर मिनट 21 टॉयलेट बनाए गए। इसकी वजह से खुले में शौच की समस्या खत्म हुई और इससे लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार हुआ।

सरकार और राज्य के कितने पैसे होते हैं खर्च?

गौरतलब है कि घर-घर टॉयलेट बनवाने की योजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को खर्च करना पड़ता है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में निधि का ये बंटवारा 90:10 का है। बाकी सभी राज्यों में केंद्र को 60 फीसदी और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत निधि देनी पड़ती है।

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