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ईरान ने भारतीय जहाजों को कैसे दे दी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की मंजूरी? एस जयशंकर ने कर दिया खुलासा

 Published : Mar 16, 2026 01:15 pm IST,  Updated : Mar 16, 2026 01:25 pm IST

ईरान ने हाल ही में भारत के दो जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी है। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। अब इस बात की उम्मीद भी बढ़ गई है कि जल्द ही फारस की खाड़ी में फंसे 22 जहाजों को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने की हरी झंडी मिल जाएगी।

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ईरान ने भारतीय जहाजों को दी होर्मुज से गुजरने के अनुमति। Image Source : AP/PTI

मिडिल ईस्ट जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की सख्ती के बीच LPG से लदे भारत के दो जहाज गुजरात तट पर पहुंचने वाले हैं। इनमें से एक शिवालिक आज दोपहर 1 से 2 बजे के बीच गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। वहीं, नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में करीब 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होते ही ईरान ने साफ शब्दों में कहा था कि वो होर्मुज से तेल की एक बूंद नहीं गुजरने देगा। हालांकि, भारत के जहाजों को होर्मुज से निकलने की खबर ने पूरी दुनिया को हैरान कर के रख दिया है। इस बीच अब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुलासा किया है कि आखिर भारत को होर्मुज से जहाजों को ले जाने में कामयाबी कैसे मिली।

क्या बोले एस जयशंकर?

दरअसल, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं। यहां उन्होंने फायनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में कहा- फिलहाल मैं उनसे (ईरान) बात करने में लगा हूं और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे निकले हैं। अगर इस बातचीत से मेरे लिए परिणाम सामने आ रहे हैं, तो मैं इस पर ध्यान देना जारी रखूंगा। निश्चित रूप से, भारत के दृष्टिकोण से, यह बेहतर है कि हम तर्क करें और समन्वय करें और हमें समाधान मिल जाए। अगर इस तरह से अन्य लोगों को शामिल होने की अनुमति मिलती है, तो मुझे लगता है कि दुनिया इसके लिए बेहतर है।" बता दें कि हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने ने भी बयान दिया है कि ईरान उन देशों से बातचीत के लिए तैयार है जो अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग पर चर्चा करना चाहते हैं।

'हर रिश्ता अपनी खूबियों पर खड़ा होता है'

एस जयशंकर से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी भारत के इस कदम को फॉलो कर सकते हैं? इस पर उन्होंने कहा- "बिल्कुल, हर रिश्ता अपनी खूबियों पर खड़ा होता है। मेरे लिए इसकी तुलना किसी अन्य रिश्ते से करना बहुत कठिन है। जिसमें ये हो भी सकते हैं और नहीं भी। हम जो कर रहे हैं उसे साझा करने में मुझे खुशी होगी। मैं जानता हूं कि कई लोगों ने तेहरान के साथ भी बातचीत की है।"

भारत और ईरान के बीच रिश्ता है- जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- "भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई 'Blanket Arrangement' नहीं की गई है। हर जहाज की आवाजाही एक व्यक्तिगत घटना है। जयशंकर ने इस बात से भी इनकार किया है कि इसके बदले में ईरान को कुछ मिला है। जयशंकर ने एक-दूसरे के साथ व्यवहार करने के इतिहास का हवाला देते हुए कहा- "यह एक्सचेंज का मुद्दा नहीं है। भारत और ईरान के बीच एक रिश्ता है। और यह एक ऐसा संघर्ष है जिसे हम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। अभी शुरुआत है, हमारे पास वहां कई और जहाज हैं। हालांकि, ये एक स्वागत योग्य डेवलपमेंट है, लेकिन बातचीत जारी।"

 

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