कर्नाटक के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को दक्षिण कन्नड जिले के धर्मस्थल में एक रैली आयोजित कर शहर में कई हत्याओं, बलात्कारों और दफनाने के आरोपों की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। बीजेपी के मुताबिक, पूरे कर्नाटक से लगभग एक लाख लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पार्टी के मुताबिक यह धर्मस्थल के ‘मंदिर और उसकी परंपराओं को बदनाम करने के प्रयास’ के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन था।
रैली में शामिल हुए ये नेता
‘धर्मस्थल चलो’ नाम से आयोजित रैली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र, सांसद और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
CBI और NIA को सौंपी जाए जांच
विजयेंद्र ने रैली को संबोधित करते हुए केंद्र से इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) को सौंपने का आग्रह किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर हिंदू समुदाय को ‘न्याय दिलाने में विफल’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने 2003 में लापता हुई एक युवती के लम्बे समय से लंबित मामले का भी सदंर्भ दिया और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए पार्टी के समर्थन को दोहराया।
इस मामले की अभी SIT कर रही जांच
बीजेपी नेताओं ने कहा कि इस रैली का उद्देश्य कर्नाटक के सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से को ‘बदनाम करने के अभियान’ का मुकाबला करना था। कांग्रेस सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। हालांकि, बीजेपी का कहना है कि केवल एक केंद्रीय एजेंसी ही पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर सकती है। इससे पहले दिन में विजयेंद्र और अशोक ने भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मंजूनाथ मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े से भी मुलाकात की।
जानिए क्या है ये मामला?
बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ, जब एन चिन्नैया नामक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में दर्जनों शव-जिनमें यौन उत्पीड़न के निशान वाली महिलाओं के शव भी शामिल हैं, दफनाए गए हैं। चिन्नैया को झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। (भाषा के इनपुट के साथ)