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मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को एनआईए कोर्ट से जमानती वारंट जारी, जानिए पूरा मामला

मालेगांव में विस्फोट 29 सितंबर, 2008 को हुआ था। उत्तरी महाराष्ट्र के मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल पर बम रखा गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोगों की जान चली गई थी।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Nov 05, 2024 07:31 pm IST, Updated : Nov 05, 2024 07:52 pm IST
बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा ठाकुर- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने मंगलवार को 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। भोपाल से बीजेपी की पूर्व सांसद प्रज्ञा 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी हैं।

क्या है मालेगांव ब्लास्ट केस?

यह मामला 29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोट से जुड़ा है, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मालेगांव ब्लास्ट मामले को एनआईए को सौंपे जाने से पहले प्रारंभिक जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी। महाराष्ट्र एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ भी की थी।

साध्वी प्रज्ञा के वकील ने कोर्ट में दी थी ये दलील

पिछले महीने प्रज्ञा ठाकुर के वकील ने कोर्ट को बताया था कि विस्फोट प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) द्वारा किया गया हो सकता है। ठाकुर की ओर से पेश हुए वकील जेपी मिश्रा ने दावा किया कि मालेगांव के भीकू चौक पर हुए विस्फोट के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने से रोका था। संभवतः आरोपियों को बचाने के लिए ऐसा किया गया होगा।

मार्च में भी जारी हुआ था वारंट

मालेगांव विस्फोट मामले में प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जारी किया गया यह पहला वारंट नहीं है। इस साल मार्च में एनआईए कोर्ट ने भी बीजेपी नेता की गिरफ्तारी के लिए जमानती वारंट जारी किया था, जो विस्फोट में मुख्य आरोपी हैं। तब 10,000 रुपये का वारंट इसलिए जारी किया गया था, क्योंकि प्रज्ञा ठाकुर को पेश होने का निर्देश दिए जाने के बावजूद वह कोर्ट में अनुपस्थित रहीं थीं।

कोर्ट में दिया गया था खराब स्वास्थ्य का हवाला

मार्च की सुनवाई के दौरान प्रज्ञा ठाकुर के वकील ने उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कोर्ट में उपस्थिति से छूट का अनुरोध किया था। इसके साथ ही भोपाल में उनके डॉक्टर द्वारा जारी एक पत्र की फोटोकॉपी कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी।

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