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SC में शख्स का हंगामा, कागज़ फेंका, CJI के खिलाफ अभद्र भाषा का किया प्रयोग, जानें फिर क्या हुआ

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Kajal Kumari
 Published : Jul 10, 2026 04:58 pm IST,  Updated : Jul 10, 2026 07:34 pm IST

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हंगामा हुआ, जब खुद अपनी पैरवी कर रहे एक व्यक्ति ने मुख्य न्यायाधीश के साथ बदसलूकी की, कोर्ट रूम में कागज़ फेंके और कार्यवाही में बाधा डाली। जानें फिर क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट में हंगामा Image Source : REPORTER

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा
  • CJI के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग
  • याचिकाकर्ता ने खूब हंगामा किया

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तब हंगामा मच गया जब एक याचिकाकर्ता ने खूब हंगामा किया और सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द भी कहे। पुलिस ने याचिकाकर्ता को हिरासत में ले लिया है। खुद पार्टी इन पर्सन के तौर पर पेश हुआ था याचिकाकर्ता और फिर उसने जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जमकर हंगामा किया। खुद को “सॉवरेन” बताने वाले याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम में कागज उछाले और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे कोर्टरूम से बाहर ले जाया गया और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में कब हुई घटना

सुप्रीम कोर्ट में यह घटना शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई। याचिकाकर्ता, जिसकी पहचान प्रबल प्रताप के तौर पर हुई, बेंच के सामने पेश हुआ और खुद को संप्रभु बताया और जजों को "न्यायिक सेवक" कहकर संबोधित करते हुए उसने कहा, "मिस्टर न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ASP के खिलाफ साइबर क्राइम सिंडिकेट चलाने के लिए FIR दर्ज करने का आदेश दें।"


हैरान होकर जस्टिस ने क्या कहा

याचिकाकर्ता की ये बातें सुनकर हैरान जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने अविश्वास के साथ उससे पूछा, "आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?" हालांकि, इसके बाद याचिकाकर्ता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी अपशब्द कहे और हवा में कागज़ फेंककर सुनवाई में बाधा डाली। कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दखल दिया और उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया। इसके बाद उसे कुछ समय के लिए कोर्ट रूम के अंदर ही DSP के ऑफिस में हिरासत में रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
याचिकाकर्ता के हंगामे के बावजूद, बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना ​​या कोई अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया। आदेश सुनाते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, "हम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं रखते हैं। जहां तक मामले के गुण-दोष का सवाल है, हमने रिकॉर्ड देख लिए हैं। हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला। स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) खारिज की जाती है। जज ने कहा, "वह बहुत परेशान हैं... यह सब निराशा की वजह से है। हमारी सहानुभूति उनके साथ है।"

क्या था मामला
याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें लखनऊ के स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम्स) के फैसले के खिलाफ उनकी रिट याचिका खारिज कर दी गई थी मजिस्ट्रेट ने FIR दर्ज करने का आदेश देने के बजाय उनकी अर्जी को प्राइवेट शिकायत के तौर पर मानने का निर्देश दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पास एक असरदार वैकल्पिक उपाय मौजूद था और उन्हें सही फोरम में जाने की छूट दी। हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने की कोई वजह न पाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल लीव पिटिशन खारिज कर दी और मामला खत्म हो गया।

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