Saturday, February 07, 2026
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आज ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, घर से निकलने से पहले जान लें कब तक नहीं मिलेगी सर्विस, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने शनिवार को देश भर में हड़ताल पर रहेंगे। ड्राइवर छह घंटे तक ऑफलाइन रहेंगे। इस दौरान देश में ओला, उबर और रैपिडो सर्विस नहीं मिलेगी।

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
Published : Feb 07, 2026 07:51 am IST, Updated : Feb 07, 2026 07:57 am IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्लीः 7 फरवरी यानी आज पूरे भारत में यात्रियों को अपने ट्रैवल प्लान में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ऐप-बेस्ड राइड प्लेटफॉर्म ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों ने देश भर में हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। यह हड़ताल मिनिमम किराए पर सरकार के दखल और कमर्शियल राइड के लिए प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल पर कड़े नियमों की मांग को लेकर बुलाई गई है। यह हड़ताल छह घंटे तक जारी रहेगी। 

उबर, ओला ड्राइवरों ने हड़ताल क्यों की है

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और दूसरे नेशनल लेबर बॉडीज़ ने मिलकर की है। यूनियन का कहना है कि कोई मिनिमम किराया नहीं। कोई रेगुलेशन नहीं। कभी न खत्म होने वाले शोषण से वे लोग परेशान हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी को लिखे एक लेटर में यूनियन ने देश भर में ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के सामने आने वाली समस्याओं को उठाया। यूनियन ने कहा कि ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर और ऑटो, कैब और बाइक टैक्सी चलाने वाले दूसरे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले राइडर्स के लिए सरकार का कोई तय किराया सिस्टम नहीं है, इसलिए कंपनियां खुद ही किराया तय करती हैं।

यूनियन ने कहा कि एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म खुद ही किराया तय कर रहे हैं, जबकि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 पहले से ही लागू हैं। यूनियन ने कहा कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के बावजूद, प्लेटफॉर्म मनमाने ढंग से किराया तय कर रहे हैं। हमारी मांगें साफ हैं: मिनिमम बेस किराया नोटिफाई करें। कमर्शियल राइड के लिए प्राइवेट गाड़ियों का गलत इस्तेमाल बंद करें। 

ड्राइवरों की कमाई हुई कम

यूनियन के मुताबिक, सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए मिनिमम किराए की कमी के कारण ड्राइवरों की कमाई कम हो गई है और इनकम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसने यह भी कहा कि कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के लिए प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल से लाइसेंस वाले ड्राइवरों के लिए गलत कॉम्पिटिशन पैदा हुआ है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए ऐप-बेस्ड काम पर निर्भर हैं।

 
यूनियन की मुख्य मांगें

यूनियन ने दो मुख्य मांगें उठाई हैं। पहली मांग है कि ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सर्विस, जिसमें ऑटो, कैब, बाइक टैक्सी और दूसरी एग्रीगेटर-बेस्ड सर्विस शामिल हैं, के लिए मिनिमम बेस किराए का तुरंत नोटिफिकेशन जारी किया जाए। यूनियन ने कहा है कि इन किराए को मान्यता प्राप्त ड्राइवर और वर्कर यूनियनों से सलाह करके फाइनल किया जाना चाहिए और मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 का पालन करना चाहिए।

दूसरी मांग है कि कमर्शियल पैसेंजर और गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए प्राइवेट, नॉन-कमर्शियल गाड़ियों के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई जाए। यूनियन के अनुसार, इस प्रैक्टिस से लाइसेंस्ड ड्राइवरों को नुकसान होता है और सेक्टर में इनकम का दबाव और बढ़ता है।

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