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पद्म भूषण से सम्मानित संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, संसद से 37 साल तक जुड़े रहे

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jun 04, 2026 11:28 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 11:38 pm IST

पद्म भूषण डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

Dr. Subhash Kashyap passes away- India TV Hindi
डॉ. सुभाष कश्यप का निधन Image Source : X/@PIYUSHGOYAL

देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ, राजनीति और संसद मामलों के जानकार डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है। उन्होंने 97 साल की उम्र में अपने घर पर आखिरी सांस ली। जानकारी के मुताबिक, उनका निधन दिल और फेफड़ों के काम बंद करने यानी कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट की वजह से हुआ। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से गहरा दुःख हुआ है। वे भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान हमारे समाज के लिए समृद्ध साबित हुआ। लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रति उनका लेखन और समर्पण सराहनीय था। उनके परिवार और मित्रों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।"

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी उनके निधन पर दुख जताया-

37 साल तक संसद से जुड़े रहे

डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को हुआ था। डॉ. कश्यप का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। किशोरावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हो गए थे। उन्होंने साल 1953 में संसद सचिवालय से अपने करियर की शुरुआत की थी और करीब 37 सालों तक संसद से जुड़े रहे। वह 1984 से 1990 तक देश की 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव रहे। उन्होंने जिनेवा में 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन' (IPU) का नेतृत्व भी किया था।

डॉ. कश्यप भारत सरकार के लिए पंचायती राज कानूनों के सलाहकार रहे। इसके अलावा, जब देश के संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाया गया था, तो वह उसके सदस्य और ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष भी थे। वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (INBA) के अध्यक्ष भी रहे।

2015 में मिला था 'पद्म भूषण'

देश और समाज के लिए किए गए उनके शानदार कामों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2015 में उन्हें देश के बड़े सम्मानों में से एक 'पद्म भूषण' से नवाजा था। उनकी लिखी किताबें आज भी छात्रों और कानून के जानकारों के लिए एक गाइड की तरह हैं।

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