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पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बड़ी खबर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NIA को सौंपी जांच

 Reported By: Manish Prasad Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Apr 26, 2025 10:42 pm IST,  Updated : Apr 27, 2025 06:38 am IST

पहलगाम आतंकी हमले की जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NIA को सौंपी है। गौरतलब है कि हालही में पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी।

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पहलगाम आतंकी हमले की जांच NIA को सौंपी गई Image Source : PTI/FILE

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच NIA को सौंपी है। MHA ने जांच का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। अब इस मामले में NIA केस दर्ज करके इन्वेस्टिगेशन करेगी। NIA लोकल पुलिस से पहलगाम हमले की जांच की केस डायरी और FIR लेगी। इससे पहले NIA की टीम पहलगाम में पहले से ही मौजूद है। वह सीन ऑफ़ क्राइम वाली जगह का निरीक्षण कर चुकी है। NIA के साथ उसकी फॉरेंसिक टीम भी कश्मीर के पहलगाम में मौजूद है।

पहलगाम आतंकी हमला कब और कहां हुआ?

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को दोपहर लगभग 2:45 से 3:00 बजे के बीच आतंकी हमला हुआ था। ये जगह अनंतनाग जिले में पहलगाम से 6-7 किलोमीटर दूर बैसरन घाटी में थी। इसे 'मिनी स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। जब पर्यटक घुड़सवारी, भेलपुरी खाने, पिकनिक मनाने, या वादियों का आनंद ले रहे थे, उसी दौरान आतंकी बैसरन घाटी में घुसे। उनके पास AK-47, M4 कार्बाइन, और अन्य स्वचालित हथियार थे। कुछ आतंकियों ने बॉडी कैमरा पहना था। 

इन आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनके नाम, धर्म, और पहचान-पत्र पूछे। कुछ को कलमा पढ़ने के लिए कहा गया। इसके बाद पुरुषों को एक तरफ करके गोलियां मारना शुरू कर दिया। कुछ पर्यटकों की पैंट उतरवाई गई ताकि उनके धर्म की पुष्टि हो सके। आतंकियों के इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई।

इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है और पाकिस्तान से संचालित होता है। इसका मास्टरमाइंड सैफुल्लाह खालिद था, जो पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट से ऑपरेट करता है। उसने एक महीने पहले हमले की चेतावनी दी थी। हमले के बाद आतंकी पहाड़ियों और जंगलों की ओर भाग गए।

इस हमले के बाद कश्मीर में 1450 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिसमें 250 ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) शामिल थे। वहीं भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित किया, और पाकिस्तान ने शिमला समझौता रद्द किया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।

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