1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. Rajat Sharma's Blog | बांग्लादेशी घुसपैठिए: अमित शाह ने रुख कड़ा किया

Rajat Sharma's Blog | बांग्लादेशी घुसपैठिए: अमित शाह ने रुख कड़ा किया

 Published : Mar 28, 2025 06:17 pm IST,  Updated : Mar 29, 2025 06:20 am IST

भारत में अवैध घुसपैठियों को रोकने के लिए कानून आजादी से पहले बने थे और अब तक चले आ रहे हैं। अमित शाह ने 1920, 1939 और 1946 में बने कानूनों को वक्त की जरूरत के हिसाब से बदला है। अब भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसना और यहां आकर बसना मुश्किल हो जाएगा।

Rajat sharma, INDIA TV- India TV Hindi
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर जबरदस्त वार किया। अमित शाह ने कहा कि बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ के लिए ममता बनर्जी की पार्टी और उनकी सरकार जिम्मेदार है। अमित शाह ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए बंगाल में घुसते हैं, तृणमूल कांग्रेस के नेता उनका आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाते हैं और वही आधार और वोटर कार्ड लेकर बांग्लादेशी घुसपैठिए दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचते हैं। अमित शाह ने कहा कि बांग्लादेश सीमा के 75 प्रतिशत हिस्से पर फैन्सिंग का काम पूरा हो गया है, जो 25 प्रतिशत काम बचा है, उसके लिए भी बंगाल सरकार जिम्मेदार है क्योंकि फेन्सिंग के लिए राज्य सरकार जमीन नहीं दे रही है। अमित शाह ने कहा कि 2026 में बंगाल में बीजेपी की सरकार बनेगी और घुसपैठ का ये रूट हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। बात सिर्फ बांग्लादेशी घुसपैठियों की नहीं है। गैरकानूनी प्रवेश अब एक ग्लोबल इश्यू बन गया है। डॉनल्ड ट्रंप ने इसे चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाया था और अब वो सख्ती से गैर कानूनी तौर पर अमेरिका में रहने वालों को निकाल रहे हैं। भारत में अवैध घुसपैठियों को रोकने के लिए कानून आजादी से पहले बने थे और अब तक चले आ रहे हैं। अमित शाह ने 1920, 1939 और 1946 में बने कानूनों को वक्त की जरूरत के हिसाब से बदला है। अब भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसना और यहां आकर बसना मुश्किल हो जाएगा लेकिन लगे हाथ अमित शाह ने ममता बनर्जी और एम के स्टालिन पर भी वार कर दिए। लोगों को ये बता दिया कि बांग्लादेश से जो लोग गैरकानूनी तरीके से आए उनके वोटर कार्ड और आधार कार्ड कैसे बनते हैं और ये घुसपैठिए दिल्ली और मुंबई तक कैसे पहुंचते हैं। नया कानून बनने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से निकाले का काम आसान हो जाएगा और ये ममता बनर्जी को बिलकुल पसंद नहीं आएगा।

वक्फ बिल के विरोध के नाम पर सियासी पैंतरे

रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार को देश भर में अलविदा की नमाज़ पढ़ी गई। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक सियासी चाल चली। देशभर के मुसलमानों से अपील की कि सभी लोग हाथ में काली पट्टियां बांधकर रमजान के आखिरी जुमे की नमाज़ पढ़ें। कई शहरों में मुसलमान बांह पर काली पट्टी बांध कर नमाज़ के लिए पहुंचे। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि मोदी सरकार मुसलमानों के खिलाफ वक्फ बिल ला रही है इसलिए नमाज के दौरान काली पट्टियां बांधकर सरकार के इस फैसले का विरोध करें। मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की तरफ से आयोजित इफ़्तार पार्टियों का भी बायकॉट किया। तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने वक़्फ़ बिल के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करवाया। वक्फ बोर्ड के मसले को कुछ मौलानाओं और संगठनों ने शक्ति प्रदर्शन का तरीका बना लिया है। इसीलिए रमजान की आखिरी जमातुल विदा नमाज़ पर काली पट्टी बांधने को कहा। ये लोग वक्फ कानून के गुण-दोष पर चर्चा नहीं करते। वे मुसलमानों को ये कहकर डराते हैं कि कानून आया तो सरकार मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर कब्जा कर लेगी। कानून बनाने वाले कहते हैं कि इसमें ऐसा कुछ नहीं है। दूसरी कोशिश नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडु जैसे नेताओं को डराने की हो रही है। कुल मिलाकर ये मामला पूरी तरह सियासी हो गया है और जो पार्टियां मुस्लिम वोटों के आधार पर सियासत करती हैं, वे आग में घी डालने का काम कर रही हैं। लेकिन अबतक यही लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद मुस्लिम संगठन और मौलाना आम गरीब मुसलमान को इस मसले से नहीं जोड़ पाए हैं।

न्यायपालिका में जनता का विश्वास बने रहना चाहिए, चाहे जो करना पड़े

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवन्त वर्मा के घर में नोटों से भरी बोरियों के मामले में FIR दर्ज करने की याचिका पर आज सुनवाई करने से इंकार कर दिया। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्ज्वस भूयां की पीठ ने इसे समयपूर्व बताते हुए कहा कि जांच समिति का काम पूरा होने के बाद ही मुख्य न्यायाधीश फैसला करेंगे कि आगे क्या कार्रवाई की जाय। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया है लेकिन उन्हें वहां कोई न्यायिक काम नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने दिल्ली फ़ायर सर्विस के चीफ़ का बयान भी रिकॉर्ड किया। दिल्ली पुलिस के उन आठ कर्मचारियों के फ़ोन ज़ब्त कर लिए गए, जो 14 मार्च की रात को आग लगने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के बंगले पर पहुंचे थे। इन्हीं पुलिसवालों में से एक ने उस रात स्टोर रूम में नोटों से भरी जली हुई बोरियों का वीडियो बनाया था। तुग़लक़ रोड थाने के SHO का मोबाइल फ़ोन भी ज़ब्त कर लिया गया। जस्टिस वर्मा का बंगला  तुग़लक़ रोड थाने के इलाके में आता है। जस्टिस वर्मा का पक्ष रखने के लिए उनके वकील भी जांच समिति के सामने पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के लिए जस्टिस वर्मा के केस को हैंडल करना तलवार की पैनी धार पर चलने जैसा है। एक तरफ उन्हें ये सुनिश्चित करना है कि लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे। इसके लिए इस केस की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। दूसरी तरफ न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कायम रखने की चुनौती है। इसीलिए जांच किसी दूसरी एजेंसी को नहीं दी जा सकती। तीसरी बात है, राजनीतिक दबाव। संसद में कहा गया कि जज के यहां से कैश मिला है, उसकी जांच लोकपाल को क्यों नहीं सौंपी जा सकती?  कांग्रेस के एक नेता ने इस मामले में कानून मंत्री से संसद में बयान देने को कहा है। NJAC को नए रूप में जीवनदान देने की बात भी चल रही है। एक और चुनौती है जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर को लेकर। इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने इसे बड़ा मसला बनाया है और उनकी बात न्यायोचित भी लगती है कि एक जज, जिस पर आरोप लगे हैं, उसे उसके पैरेंट कोर्ट में कैसे भेजा जा सकता है? इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए इन सारी बातों के बीच में संतुलन बनाए रखना मुश्किल काम है। मुझे लगता है, चाहे जो भी करना पड़े, न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा कायम रहना चाहिए। एक जज की वजह से सारी व्यवस्था से विश्वास नहीं उठना चाहिए। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 27 मार्च, 2025 का पूरा एपिसोड

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत