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कौन है शाहजहाँ शेख, आखिर कैसे राजनीतिक रसूख कायम रखते हुए बना डाली आकूत संपत्ति?

 Published : Feb 28, 2024 02:17 pm IST,  Updated : Feb 28, 2024 02:17 pm IST

शाहजहां शेख का राजनीतिक रसूख इतना था कि पुलिस उसके खिलाफ एफआईआर तक नहीं लिखने की हिम्मत जुटा पाती थी। जानें कैसे उसने फैला रखा था अपना आतंक...

शाहजहां शेख- India TV Hindi
शाहजहां शेख Image Source : FILE PHOTO

आजकल पूरे देश में एक नाम काफी सुर्खियां बटोर रहा है... शाहजहाँ शेख। ये नाम कुछ दिनों पहले तक गुमनाम की तरह सिर्फ अपने क्षेत्र तक ही सीमित था, पर 5 जनवरी को ईडी अधिकारियों पर हुए हमले ने ये नाम पूरे देश के जुबान पर चढ़ा दिया। राष्ट्रीय सुर्खियों में आने से लगभग दो दशक पहले, 42 वर्षीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पदाधिकारी शाहजहाँ शेख को पहली बार 2006 में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, जब उन्हें पहली बार पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था। शेख तब 20 साल के थे और पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में एक मछली बाजार में एक एजेंट के रूप में काम करते थे।

शेख को कोई डर नहीं था

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, उस समय भी शाहजहां शेख को कोई डर नहीं था। इसका कारण भी जल्द समझ आ गया। इस कार्रवाई के महज आधे घंटें की भीतर ही शेख को छोड़ दिया गया और कुछ दिनों बाद थाना प्रभारी का तबादला हो गया। उस समय सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक स्थानीय पदाधिकारी का साथ शेख स्पष्ट रूप से काम आया।

₹2 करोड़ से अधिक राशि, 17 कारों का बेड़ा

इस दौरान शेख की अमीर बनने की कहानी जारी रही क्योंकि उन्होंने 34 साल के वाम मोर्चे के शासन के बाद 2011 में पहली बार सत्ता में आने से एक साल पहले टीएमसी को छोड़कर अपना राजनीतिक दबदबा बरकरार रखा था। पिछले कुछ वर्षों में उनके पास ₹2 करोड़ से अधिक की बैंक में जमा राशि, 17 कारों का बेड़ा और 40 बीघे जमीन है। यह उनके ईंट भट्ठे के दिनों से बिल्कुल अलग है, जहां उन्होंने महज ₹50 पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया था।

क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने कहा कि शेख पिछले 20 वर्षों से सत्ता के राइट विंग की ओर रहा हैं। “2004 से 2010 तक, उसे संदेशखाली क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। 2010 में, उसने पाला बदल लिया और ममता बनर्जी की टीएमसी में शामिल हो गया। कुछ ही सालों में, वह टीएमसी संदेशखाली, उत्तर 24 परगना के संयोजक बन गया।"

"पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने की हिम्मत नहीं"

अधिकारी ने आगे नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब तक शेख सुर्खियों में नहीं आया, उसका आतंक शासन इतना प्रभावी था कि स्थानीय पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने कहा कि 2020 से 2023 के बीच उनके खिलाफ विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 16 जमीन हड़पने, 13 हत्या या हत्या के प्रयास, 5 बलात्कार और 17 आपराधिक साजिश की शिकायतें दर्ज की गईं। उन्होंने कहा “लेकिन इनमें से कोई भी शिकायत एफआईआर का रूप नहीं ले सकी। उसे कानून का कोई डर नहीं है। वह खुलेआम कहता है, कोई मुझे छू भी नहीं सकता।"

उन्होंने आगे कहा कि शेख पर शायद कभी कार्रवाई न होती, अगर उसके समर्थकों की भीड़ ने 5 जनवरी को, कथित राशन वितरण घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसके परिसरों की तलाशी लेने गई ईडी की टीम पर कथित तौर पर  हमला न किया होता।

आतंक से तंग आकर संदेशखाली के लोग सड़कों पर

संदेशखाली में बार-बार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने शेख को खबरों में बनाए रखा है। संदेशखाली के लोग यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोप में शाहजहां और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए। बता दें कि स्थानीय टीएमसी पदाधिकारी और शेख के सहयोगी शिबाप्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार उन 18 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यौन उत्पीड़न, जमीन पर कब्जा करने और संदेशखाली में हिंसा भड़काने की शिकायतों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।

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