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देश की जनता से बार-बार तेल कम खाने के लिए क्यों कह रहे पीएम मोदी, इससे क्या फायदे होंगे, क्या हैं तेल के विकल्प?

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 11, 2026 05:20 pm IST,  Updated : May 11, 2026 05:20 pm IST

भारत ने साल 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये का तेल आयात किया था। अगर हर भारतीय अपने खाने में तेल की मात्रा थोड़ी कम करे तो तेल के आयात में कमी आएगी और इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत पर पड़ेगा।

PM Modi Oil Consumption- India TV Hindi
पीएम मोदी ने तेल कम खाने की अपील की है Image Source : PTI/FREEPIK

पीएम मोदी ने शनिवार को एक बार फिर देश के लोगों से तेल कम खाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने तेलंगाना में अपने संबोधन के दौरान देश के सभी लोगों से कई अपील कीं। इनमें एक साल तक सोना न खरीदना, ईंधन की खपत कम करना, विदेश यात्रा से बचना और तेल कम खाना शामिल है। पीएम ने कहा कि ऐसा करने से देश में विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ेगा। ऐसा होने से रूपये की स्थिति बेहतर होगी।

खाना बनाने के लिए मुख्य रूप से सरसों, सोयाबीन और पाम तेल का उपयोग किया जाता है। इनमें सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला पाम तेल भारत कई देशों से आयात करता है, जिसमें इंडोनेशिया-मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। इसके अलावा अर्जेंटीना-ब्राजील से सोयाबीन और रूस-यूक्रेन से सूरजमुखी के तेल का आयात किया जाता है। साल 2025-26 में भारत ने 1,85,667 करोड़ रुपये के खाद्य तेल का आयात किया था। इसमें कमी आने पर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे रुपया मजबूत होने की उम्मीद है।

लोगों की सेहत पर भी असर

तेल का आयात कम होने से रुपये की स्थिति मजबूत होगी। अगर हर घर में तेल की खपत में थोड़ी भी कमी आती है तो तेल के आयात में बड़ा असर पड़ेगा और इससे देश की मुद्रा मजबूत स्थिति में आएगी। हालांकि, रुपये की कीमत कई कारणों से ऊपर-नीचे होती है। ऐसे में तेल की खपत में कमी का प्रभाव इस पर सीमित होगा, लेकिन तेल कम खाने से हर व्यक्ति की सेहत पर बड़ा असर होगा। डॉक्टरों के अनुसार तेल ज्यादा खाने से मोटापा बढ़ता है। यह डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का भी कारण बनता है। पिछले कुछ सालों में इन बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसे कम करने के लिए तेल की खपत कम करना बेहद जरूरी है।

क्या हैं तेल के विकल्प?

भारतीय खान-पान में तेल में तली हुई चीजों का उपयोग बहुतायत में होता है। समोसा, कचौड़ी से लेकर पूरी और भटूरे का भोजन भारत में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनमें सबसे ज्यादा तेल का इस्तेमाल होता है और लोगों की सेहत पर इसका असर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार इनकी जगह ऐसे खाने को प्रमुखता दी जानी चाहिए, जिसे उबाला गया हो। बेहद कम तेल या घी में खाने को एयर फ्राई किया जा सकता है। कम तेल में हल्का तलकर खाना बनाने की आदत डालनी चाहिए। सब्जी में दही और मूंगफली पीसकर डालने से भी कम तेल में स्वादिष्ट सब्जी बनाई जा सकती है। खाने में स्वाद तेल से नहीं आता। खाने में पड़ने वाले मसाले और अन्य सामान से स्वाद आता है और उनका सही तरीके से पकना जरूरी है। ऐसे में हर खाने को तलने की बजाय, उसे उबालने, भूनने और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। डॉक्टर तेल का उपयोग पूरी तरह से बंद करने के लिए नहीं कहते हैं, बल्कि इसकी मात्रा कम करने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके आप अपने खाने का स्वाद बरकरार रखते हुए अपनी सेहत भी बेहतर कर सकते हैं।

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