भारतीय जनता पार्टी आज के समय में सदस्यों के हिसाब से विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। साल 2014 से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन की सरकार है। इसके अलावा देश के 20 से ज्यादा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार है। आपको बता दें कि 6 अप्रैल की तारीख भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद खास दिन है। क्योंकि इसी तारीख को साल 1980 भाजपा की स्थापना की गई थी। ऐसे में आइए जानते हैं भाजपा के इतिहास से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें।
जनसंघ से जुड़ा है भाजपा का इतिहास
भारतीय जनता पार्टी का गठन तो साल 1980 में किया गया लेकिन इसका इतिहास आजादी के बाद ही गठित की गई पार्टी भारतीय जनसंघ से जुड़ा है। 21 अक्टूबर, 1951 को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को स्थापना की गई थी। तुष्टिकरण, पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार , लाइसेंस-परमिट-कोटा राज, राष्ट्रीय सुरक्षा पर लापरवाही, राष्ट्रीय मसलों जैसे कश्मीर आदि मुद्दों पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि, कश्मीर के मुद्दे पर आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जेल में डाल दिया गया जहां साल 1953 में रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। इसके बाद पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने जनसंघ की कमान संभाली। साल 1977 के आम चुनाव के दौरान इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जबरदस्त विरोध हो रहा था। ऐसे में जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर एक नए राष्ट्रीय दल ‘जनता पार्टी’ का गठन किया गया। चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी एवं अन्य विपक्षी दलों को जीत मिली। इसके बाद 1977 में भारतीय जनसंघ का विलय जनता पार्टी में कर दिया गया।
कब और क्यों हुई भाजपा की स्थापना?
जनता पार्टी की स्थापना के साथ ये प्रयोग ज्यादा दिन तक नहीं चल सका। करीब दो साल बाद ही जनता पार्टी में कलह सामने आने लगी। जनसंघ से जनता पार्टी में आए लोगों के खिलाफ दोहरी सदस्यता का मामला उठाया जाने लगा। 4 अप्रैल साल 1980 में जनता पार्टी ने अपने सदस्यों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य होने पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, पूर्व में जनसंघ के सदस्य रहने वाले नेताओं ने इसका विरोध किया। इसके बाद 6 अप्रैल 1980 को एक नए संगठन भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की गई। अटल बिहारी वाजपेयी को भाजपा का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

2 सीटों से सत्ता तक का सफर
भाजपा को साल 1984 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटों पर जीत हासिल हुई। हालांकि, साल 1989 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और 85 सीटें हासिल कर ली। चुनाव के बाद भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि, राम मंदिर आंदोलन के दौरान भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया और वीपी सिंह की सरकार गिर गई।
इसके बाद भाजपा ने लोकसभा में 1989 में 85, 1991 में 120 और 1996 में 161 सीटें हासिल की। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा सरकार ने 1996 में शपथ ली। हालांकि, पार्टी को जरूरी समर्थन नहीं मिला और ये सरकार मात्र 13 दिन ही चल पाई। फिर 1998 में आम चुनाव हुए जिसमें भाजपा ने 182 सीटों पर जीत हासिल की और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। हालांकि, ये सरकार भी लोकसभा में विश्वासमत के दौरान एक वोट से गिर गई। इसके बाद 1999 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए जिसमें भाजपा को 182 सीटों पर जीत मिली और एनडीए ने 306 सीटों पर जीत हासिल की। ऐसे में एक बार फिर से देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार का गठन हुआ।
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। भाजपा को चुनाव में 282 सीटें मिली और एनडीए गठबंधन को कुल 336 सीटें हासिल हुईं। साल 1984 के बाद पहली बार ऐसा हुए जब किसी पार्टी ने अकेले दम पर बहुमत हासिल करके केंद्र में सत्ता हासिल की। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 303 सीटें जीती और एनडीए को 353 सीटें मिलीं। इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं और एनडीए गठबंधन ने 293 सीटें हासिल की। इस तरह करीब 12 साल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन केंद्र की सत्ता पर काबिज है।

वर्तमान में कितने सांसद और कितने राज्यों मे है सरकार?
वर्तमान समय में भाजपा के पास लोकसभा में 240 सांसद हैं। इसके अलावा पार्टी के पास ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में 100 से ज्यादा सांसद हैं। भारत के 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सरकार है। भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। भाजपा का दावा है कि इसके पास में करीब 11 करोड़ सदस्य हैं।