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नेहा बोरा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई जारी, मजिस्ट्रेट के नोटिस को दी है चुनौती

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Kajal Kumari
 Published : Oct 22, 2026 02:48 pm IST,  Updated : Oct 22, 2026 03:34 pm IST

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 हजार रुपये के बांड वाले निवारक नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट में आज इस मामले पर सुनवाई शुरू हो गई है।

नेहा बोरा- India TV Hindi
नेहा बोरा Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई हो रही है। जस्टिस सुब्रहमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। नेहा बोरा की ओर से याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण पैरवी कर रहे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से ASG चेतन शर्मा ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए हैं।

BNSS की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस को दी चुनौती

नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकर नारायण ने अदालत में कहा कि यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता AISA की सक्रिय नेता हैं और सरकार की नीतियों में सुधार की मांग करती रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन कहीं भी हिंसा के लिए नहीं उकसाया। उनके मुताबिक, नेहा बोरा के प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं।

जंतर-मंतर को डीनोटिफाई करने के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान

गोपाल शंकर नारायण ने अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर को शाम चार बजे सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली गई, जिसमें जंतर-मंतर को अचानक डीनोटिफाई किए जाने पर नाराजगी जताई गई थी। पोस्ट में मंडी हाउस में मिलने की बात कही गई थी। नेहा बोरा के वकील ने दलील दी कि इस पोस्ट में हिंसा भड़काने, कानून तोड़ने, शांति भंग करने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने या कोई अपराध करने के लिए लोगों को इकट्ठा करने की बात नहीं थी।

प्रदर्शन के 10-15 मिनट के भीतर हिरासत में लेने का आरोप

गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि 16 अक्टूबर की शाम को जब नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया और मंडी हाउस इलाके में पहुंचीं, तो उन्हें 10-15 मिनट के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया। वकील के मुताबिक, उस समय नेहा बोरा ने कोई अपराध नहीं किया था। उन्होंने केवल कुछ नारे लगाए थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।नेहा बोरा के वकील ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गैर-कानूनी हिरासत बताया। उन्होंने कहा कि रात में नेहा बोरा को आर.के. पुरम थाने ले जाया गया और सुबह तक किसी को यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें कहां रखा गया है।

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