लखनऊ। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए उत्तर प्रदेश में अब सैनेटाइजर की कमी नहीं होगी क्योंकि शासन ने अब 48 कंपनियों को सैनेटाइजर बनाने का लाइसेंस दे दिया है और करीब पचास हजार लीटर प्रति दिन सैनेटाइजर का उत्पादन शुरू हो गया है। आने वाले एक-दो दिनों में यह आंकड़ा साठ हजार लीटर प्रतिदिन को पार कर जाएगा। राज्य के आबकारी और चीनी, गन्ना विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय भुस रेड्डी ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के कारण प्रदेश में अचानक साफ सफाई के लिए हैंड सैनेटाइजर की मांग बढ़ गई थी, इसलिए शासन ने डिस्टलरीज (शराब निर्माण इकाइयां) और अन्य कंपनियों को सैनेटाइजर बनाने का लाइसेंस देने का फैसला किया ताकि आम जनता को सही और गुणवत्ता युक्त सैनेटाइजर मिल सकें।
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उन्होंने बताया कि उप्र सरकार ने 48 डिस्टलरीज और सैनेटाइजर बनाने वाली कंपनियों को लाइसेंस दिया है, जिसमें 29 डिस्टलरीज और 19 सैनेटाइजर कंपनिया हैं। इन सभी में सैनेटाइजर का उत्पादन पिछले 10 दिन से शुरू हो चुका है और आज तक हम 50 हजार लीटर प्रतिदिन सैनेटाइजर बना रहे हैं। एक-दो दिन में हम 60 हजार लीटर प्रतिदिन बनाने लगेंगे, तब प्रदेश में सैनेटाइजर की कमी नहीं हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि यह डिस्टलरी और सैनेटाइजर बनाने वाली कंपनियां अपने-अपने डीलरों के माध्यम से सैनेटाइजर बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा जिन जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी सीधे सैनेटाइजर की मांग कर रहे है उन्हें कंपनियों के माध्यम से तत्काल पर्याप्त मात्रा में सैनेटाइजर उपलब्ध कराया जा रहा है। भुस रेड्डी ने कहा कि प्रदेश में सैनेटाइजर की कमी किसी भी हालत में नहीं होने दी जाएगी। अगर आवश्यकता पड़ी तो उत्पादन बढ़ा दिया जाएगा।