बारामूला के पुराने शहर में स्थित अल-मुस्तफा कॉलोनी इलाके में उस समय दहशत फैल गई, जब एक तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ एक रिहायशी घर में घुस गया, जिससे निवासियों में घबराहट मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ अपने शावकों को घर के अंदर ही छोड़कर बाहर निकल गया, जिसके बाद तुरंत एक तलाशी अभियान शुरू किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही, वन्यजीव विभाग, जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को घेर लिया। तेंदुए को बेहोश करके सुरक्षित रूप से पकड़ने के लिए एक बचाव अभियान शुरू किया गया।
सभी को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा जाएगा
बाद में यह बचाव अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें वन्यजीव विभाग ने तेंदुए और उसके शावकों को सुरक्षित बचा लिया। सभी जानवरों को अपनी निगरानी में ले लिया गया है और स्थिति अब नियंत्रण में है। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ने के लिए आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
महाराष्ट्र में मादा तेंदुए को पीटा
महाराष्ट्र के जलगांव में एक मादा तेंदुए के बचाव अभियान के दौरान शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल और अन्य लोगों द्वारा उसे कथित तौर पर पीटे जाने संबंधी वीडियो प्रसारित होने के बाद पशु अधिकार संगठनों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 'पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया' (पेटा इंडिया), 'कंपेशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन' (सीयूपीए), वन्यजीव बचाव एवं पुर्नवास केंद्र (डब्ल्यूआरआरसी) और 'फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन' (एफआईएपीओ) ने बुधवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस विवाद पर पाटिल की तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
विधायक ने लाठियों से तेंदुए को पीटा
संगठनों ने जलगांव के उप वन संरक्षक (क्षेत्रीय) को भी एक याचिका सौंपकर आरोपियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज करने की मांग की है। खबरों के मुताबिक, मुक्ताईनगर में एक सरकारी अतिथि गृह के पास एक मादा तेंदुआ देखा गया था, जिसके बाद वनकर्मियों ने उसे बेहोश करने वाला इंजेक्शन (ट्रैंक्विलाइजर) दिया। जैसे ही दवा का असर शुरू हुआ वहां मौजूद विधायक पाटिल सहित कुछ लोगों ने कथित तौर पर तेंदुए का पीछा किया और वन विभाग की टीम द्वारा उसे अपने कब्जे में लिये जाने से पहले उसे (तेंदुए) लाठियों से पीटा।
शिवसेना विधायक के खिलाफ कार्रवाई की अपील
पेटा इंडिया ने अपने बयान में कहा, "यदि कोई भी, विशेष रूप से एक निर्वाचित प्रतिनिधि ही संरक्षित प्रजाति पर हमला करने वाली भीड़ में शामिल होता है और अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप करता है तो अधिकारियों को उसके खिलाफ कड़ाई और तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए।" संगठनों ने अधिकारियों से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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