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1990 के पहले जैसा नजारा! कश्मीर में फिर जगी उम्मीद, दुर्गा मंदिर में कंजक पूजन और हवन के साथ लौटी रौनक

 Reported By: Manzoor Mir,  Written By: Khushbu Rawal
 Published : Oct 19, 2026 02:15 pm IST,  Updated : Oct 19, 2026 02:15 pm IST

देश के बाकी हिस्सों की तरह, आज कश्मीर के विभिन्न मंदिरों में नवरात्रि के नौवें दिन नवमी के अनुष्ठान किए गए। माहौल को देखकर ऐसा लगता है मानो 1990 के दशक से पहले जैसी स्थितियां फिर से लौट आई हैं।

कश्मीरी पंडितों ने...- India TV Hindi
कश्मीरी पंडितों ने मनाई महाअष्टमी-महानवमी। Image Source : REPORTER INPUT

दशहरे से पहले, श्रीनगर के ऐतिहासिक दुर्गा मां मंदिर में नवरात्रि के शुभ अवसर पर महा नवमी और महा अष्टमी के साथ-साथ 'कंजक पूजन' (छोटी कन्याओं की पूजा) का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए कश्मीरी पंडितों ने इन अनुष्ठानों में हिस्सा लिया और अपने घर वापसी के लिए विशेष प्रार्थनाएं कीं। 

दुर्गा नाथ मंदिर में नवरात्रि का भव्य आयोजन

देश के बाकी हिस्सों की तरह, आज कश्मीर के विभिन्न मंदिरों में नवरात्रि के नौवें दिन (नवमी) के अनुष्ठान किए गए। सबसे खास आयोजन श्रीनगर के दुर्गा नाथ मंदिर में हुआ, जहां कई वर्षों बाद आस्था और भक्ति का एक सुंदर दृश्य देखने को मिला, जो 1990 के दशक से पहले के कश्मीर के माहौल की याद दिलाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों से आए कश्मीरी पंडितों ने रात भर चलने वाली विशेष प्रार्थनाओं में भाग लिया, जिसके बाद 'हवन' किया गया और 'भजन' गाए गए।

श्रीनगर के ऐतिहासिक मंदिर में गूंजा जय माता दी।
Image Source : REPORTER INPUTश्रीनगर के ऐतिहासिक मंदिर में गूंजा जय माता दी।

महानवमी के इस शुभ अवसर पर विशेष प्रार्थनाएं की गईं, जिनमें कश्मीर में शांति और सद्भाव की स्थापना तथा कश्मीरी पंडितों की अपने घरों में वापसी की कामना की गई। इसके अलावा, श्रीनगर के ऐतिहासिक शीतल नाथ मंदिर में 36 साल बाद घंटियों की गूंज सुनाई दी। यह जगह 1990 के दशक से वीरान पड़ी थी। 

दुर्गा नाथ मंदिर में नवरात्रि का भव्य आयोजन।
Image Source : REPORTER INPUTदुर्गा नाथ मंदिर में नवरात्रि का भव्य आयोजन।

महाअष्टमी-महानवमी एक साथ

इस वर्ष चंद्र कैलेंडर की विशेष स्थिति के कारण, महा अष्टमी और महा नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं। स्थानीय इलाकों से छोटी कन्याओं को आमंत्रित करके मंदिर के प्रांगण में बैठाया जाता है, जहां पुजारी और भक्त उनके पैर धोते हैं, उनकी आरती उतारते हैं और उन्हें पारंपरिक 'भोग' परोसते हैं जिसमें हलवा, पूरी और चने शामिल होते हैं। महा नवमी और महा अष्टमी की पूजा और साथ ही कंजक पूजा के लिए इकट्ठा हुए भक्तों की इस भीड़ को देखकर, वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरों पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। वे सभी इसे मां दुर्गा का आशीर्वाद और कृपा मान रहे थे, और सच में ऐसा लग रहा था मानो कश्मीर में फिर से जन्नत लौट आई हो।

कश्मीरी पंडितों ने शांति और घर वापसी की कामना की।
Image Source : REPORTER INPUTकश्मीरी पंडितों ने शांति और घर वापसी की कामना की।

कश्मीरी पंडितों ने की घर वापसी की प्रार्थना

इस उत्सव में शामिल होने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों से आए कश्मीरी पंडितों ने 'इंडिया टीवी' से बात की। उन्होंने बताया कि जो लोग 1990 के दशक में कश्मीर छोड़कर चले गए थे, वे अब वापस लौटना चाहते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र के हालात में काफी सुधार आया है। 1990 के दशक में आतंकवाद के दौर में जो मंदिर वीरान हो गए थे, वे पिछले कुछ वर्षों से फिर से पूजा-अर्चना के केंद्र बन गए हैं। इस माहौल को देखकर ऐसा लगता है मानो 1990 के दशक से पहले जैसी स्थितियां फिर से लौट आई हैं। हमने प्रार्थना की है कि यह शांति और सुकून बना रहे, ताकि सभी कश्मीरी पंडित अपने घरों को वापस लौट सकें।

कई सालों बाद कश्मीर में लौटी आस्था की रौनक

1990 के दशक से पहले, कश्मीर में दिवाली और नवरात्रि जैसे त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाए जाते थे। ऐसे मौकों पर मंदिरों में बड़े-बड़े मेले लगते थे। लेकिन आतंकवाद के आने के बाद, कश्मीरी पंडितों को वहां से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा और मंदिरों की घंटियां खामोश हो गईं। हालांकि, हाल के वर्षों में कश्मीर का माहौल बदलने लगा है। इसे देखकर, न केवल कश्मीरी पंडित इन त्योहारों को मनाने के लिए बड़ी संख्या में वापस आ रहे हैं, बल्कि एक नई उम्मीद भी जगी है कि वे जल्द ही अपनी मातृभूमि लौट आएंगे।

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