पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में मुनीर की फौज का कत्लेआम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मुनीर के सैनिक निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसा रहे हैं। PoK में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में दो दिन में ही 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। आपको बता दें कि PoK के लोग चुनाव, महंगाई और पाकिस्तानी फौज के अत्याचार का विरोध कर रहे हैं और पाकिस्तानी सेना उन्हें कुचलने के लिए, डराने के लिए गोलियां चला रही है। पूरे PoK में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं जिससे लोग अपना दर्द दुनिया को न बता सकें। अब इस बर्बरता पर भारत की ओर से भी बयान सामने आने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी PoK प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा की है।
क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती?
महबूबा मुफ्ती ने भी लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैनिकों की कार्रवाई की निंदा की है। PDP की प्रेसिडेंट महबूबा मुफ्ती ने PoK के हालात पर चिंता जताई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा की। X पर एक पोस्ट में, महबूबा ने कहा कि कश्मीर के दूसरी तरफ से आ रही तस्वीरें बहुत दिल दहला देने वाली हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग होते देखना दुखद है।"
कश्मीरियों को इज्जत चाहिए- महबूबा मुफ्ती
महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि वह ज्यादा मानवीय रवैया अपनाए और बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता चुने। उन्होंने कहा- "रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं और उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कोई भी देश अपने लोगों को कमजोर करके या बंदूक की नोक पर उनकी आवाज दबाकर मजबूत नहीं बनता।" महबूबा ने सरकार से कार्रवाई रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से बचने की अपील की। उन्होंने आगे कहा कि "कश्मीरियों को इज्जत, न्याय और अपनी बात कहने का अधिकार मिलना चाहिए, जुल्म नहीं।" आपको बता दें कि इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में लोगों की हत्याओं और मुश्किलों पर ध्यान देने की अपील की थी।
मीरवाइज उमर फारूक ने भी दिया बयान
वहीं, कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हुई घातक कार्रवाई और आम नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और दुख जताया है। उन्होंने इस्लामाबाद से अपील की कि वे बल प्रयोग के बजाय बातचीत, संयम और राजनीतिक संवेदनशीलता को प्राथमिकता दें।
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