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इस चतुराई की वजह से भगवानों में सर्वश्रेष्ठ बने गणेश, जान लेंगे ये कथा तो नहीं पड़ेगी किसी तीर्थ में जाने की जरूरत

आज हम आपको विघ्नहर्ता गणेश से संबंधित एक कहानी बताएंगे। ये वही कहानी है जिसकी वजह से न केवल उन्हें सबसे ज्यादा बुद्धिमान कहा जाता है साथ ही उन्हें किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा करने का अधिकार मिला।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: August 20, 2020 12:36 IST
Lord Ganesha - India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/MAZA_MORIYO_CREATION Lord Ganesha 

भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है। कोई उन्हें एक दंत के नाम से बुलाता है, कोई उन्हें गजानन, कोई उन्हें गौरीसुत, कोई लंबोदर, कोई मंगलमूर्त, कोई मूषकवाहन, कोई सिद्धि विनायक तो कोई विघ्नहर्ता। कुल मिलाकर गणेश जी के 108 नाम है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान गणेश जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों के सारे दुख हरकर उन्हें सुख और समृद्धि का वरदान देते हैं।

इस बार 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी है। इस दिन लोग बप्पा को घर पर लाते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। वैसे तो भगवान गणेश को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। लेकिन आज हम आपको विघ्नहर्ता गणेश का आपको परिक्रमा वाला किस्सा बताएंगे जिसकी वजह से न केवल उन्हें सबसे ज्यादा बुद्धिमान कहा जाता है साथ ही उन्हें किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा करने का अधिकार मिला। 

एक बार सभी देवताओं के बीच प्रश्न उठा कि किसकी पूजा सबसे पहले होनी चाहिए। सभी भगवान भोलेनाथ की शरण में गए और अपनी परेशानी उन्हें बताई। तभी देवर्षि नारद मुनि ने शिव को निर्णायक बनाने की सलाह दी। भोलेनाथ ने सभी के सामने प्रतियोगिता की शर्त रख दी। 

शिव जी ने कहा कि सभी को अपने वाहन पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करनी होगी। जो भी सबसे आएगा वो प्रथम पूजा का अधिकारी होगा। सभी देवता अपने वाहन पर सवार होकर चल पड़े। तभी गणेश जी ने चतुराई दिखाई और भोलेनाथ और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा कर अपने वाहन मूषक पर बैठ कर की। इसके बाद शांत भाव से हाथ जोड़कर खड़े हो गए। कार्तिकेय अपने मयूर वाहन से पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे और बोले कि 'मैं इस प्रतियोगिता में विजयी हुआ हूं। इसलिए प्रथम पूजा का अधिकारी मैं हूं।' 

शिव जी भगवान गणेश की ओर मुस्कुराते हिए बोले- 'तुमसे पहले ही गणेश पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर चुका है। इसलिए वो पहली पूजा का अधिकारी है। गणेश माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि वो ब्रह्मांड से भी बढ़कर हैं। गणेश ने इस बात का ज्ञान कराया है।' तब से ही हमेशा किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा होती है। 

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