4 मार्च को पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाएगा। लेकिन, मथुरा और वृन्दावन में एक हफ्ते पहले से ही होली का महा उत्सव मनाया जाता है। मथुरा वृंदावन की होली सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन क्या आप बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली की कहानी से वाकिफ हैं? दरअसल, बरसाना और नंदगांव में होली सदियों पुरानी परंपराओं के साथ मनाया जाता है। यहां की लट्ठमार होली दुनियाभर में मशहूर है, जिसमें आज भी लोग खुद को राधा-कृष्ण के युग में महसूस करते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि बरसाने और नंदगांव की होली को राधा और कृष्ण के प्रेम से जोड़कर क्यों देखा जाता है और क्यों खेली जाती है लट्ठमार होली?
बरसाना की लट्ठमार होली
27 फरवरी 2026 को बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाएगी। बरसाना को राधा रानी की नगरी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाते थे। इसके जवाब में गोपियां लाठियों से उन्हें खदेड़ती थीं। उसी परंपरा की याद में आज भी यहां लट्ठमार होली खेली जाती है। इस दिन नंदगांव के गोप बरसाने में आते हैं और यहां गोपियों के रूप में जमकर लट्ठ बरसाती हैं।
नंदगांव की होली
नंदगांव को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की भूमि माना जाता है। यहां की होली भी उतनी ही अनोखी और रंगीन होती है। बरसाना के लोग नंदगांव आते हैं और फिर रंग-गुलाल के साथ उत्सव मनाया जाता है। पारंपरिक ढोल, मंजीरे और फाग गीतों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
क्यों खास है ब्रज की होली?
ब्रज की होली कई दिनों तक चलती है। सिर्फ रंग नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की लीलाओं का मंचन भी होता है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूरा ब्रज क्षेत्र रंग बरसे के माहौल में डूब जाता है।