हेल्थ डेस्क: इन दिनों GST आने से देश का हर शख्स परेशान है। आधे लोगों को तो यह बात समझ नहीं आ रही है कि ये बला है क्या। अब GST की बात हो और महिलाओं की बात न हो। ऐसा हो ही नहीं सकता है, क्योंकि सरकार ने सेनेटरी नैपकीन में 12 % GST लगा दिया है। (इन आसानी तरीकों से कोरियाग्राफर गणेश आचार्य ने 1 महीने में घटाया 85 किलो वजन)आज क समय में भी पीरियड्स को लेकर कई ऐसी भ्रांतिया है। सेनेटरी नैपकिन्स के महत्व को सभी अच्छी तरह से जानते है। भारत की जनसंख्या में 497 मिलियन महिलाएं है। जिसमें से सिर्फ 12 प्रतिशत ही सेनेटरी नैपकिन्स का इस्तेमाल करती है। (आंखो की रोशनी रखनी है हमेशा बरकरार, तो अपनाएं ये टिप्स)वही 88 प्रतिशत महिलाएं इसके बदले पुराने कपड़े, न्यूज पेपर, रेत, ऐश, लकड़ी के तख्ते, प्लास्टिक के साथ-साथ सुखी पत्तियां इस्तेमाल करती है। सरकार से ये बात नहीं छिपी। फिर भी सेनेटरी नेपकीन में 12 प्रतिशत GST लगा दी है। जिसके खिलाफ महिलाएं जोरो-शोरों से हल्ला कर रही है। महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी इसके खिलाफ खड़े हो रहे है। इतना ही नहीं इसका हल्ला सोशल मीडिया में आसानी से देखा जा सकता है।(सिर्फ 1 रात में गीले तौलिया से करें ये काम और पेट की चर्बी को कहे बाय)वहीं एक ऐसा आर्टिस्ट सामने आया है। जो कि अपने आर्ट के जरिए सेनेटरी नैपकीन में लगे GST का विरोध कर रहा है। इस आर्टिस्ट का नाम है राज कमल ऐच(Raj Kamal Aich)।अगली स्लाइड में पढ़ें औरराज कमल अपना विरोध जताने के लिए सेनेचरी नैपकीन और टमपोंस में लाल रंग की इंक का इस्तेमाल कर रहे है। उन्होंने इस तरह से इसे आर्ट किया है कि आप देखते ही रह जाएंगे। राज ने अपनी इस आर्ट के बारें में एक न्यूज एजेंसी को बताया कि सेनेटरी नैपकीन पर ही टैक्स क्यों और कॉडोम, सिंदूर या बिंदी पर क्यों नहीं। ये मेरी समझ के परे है।सरकार को अगर अपने देश की महिलाओं की ज़रा सी भी चिंता है तो सेनेटरी नैपकीन पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए. शहरी क्षेत्र की महिलायें तो पैड के एक पैकेट के लिए 100-160 रुपये तक खर्च कर सकती हैं, पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का क्या?'अगली स्लाइड में पढ़ें औरइस तरह दुकान से खरीदा सेनेटरी नैपकीन अपनी आर्ट के लिए राज खुद ही दुकान से नैपकीन खरीदने गए। इस बारें में राज ने बताया कि जब दुकानदार से पैड मांगा, तो वो घूरकर शक्ल देखता रहा। इसके साथ ही उन्हें दुकानदार ने काली पॉलीथीन में सामान नहीं दिया। सोचने वाली बात है हमारे लिए तो पहले पॉलीथन निकलती है और फिर नैपकीन। राज ने फ़ोटो शूट का बहाना करके नैपकीन ख़रीदी थी। सरकार का ये फ़ैसला कतई सही नहीं है, क्योंकि इस निर्णय से स्त्रियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। जो कि सही नहीं है।अगली स्लाइड में देखे और तस्वीरेंअगली स्लाइड में देखे और तस्वीरें