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अष्टविनायक मंदिर: ऐसे प्राचीन मंदिर जहां भगवान गणेश जी स्वंय प्रकट हुए

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Sep 18, 2015 05:04 pm IST,  Updated : Sep 18, 2015 05:50 pm IST

नई दिल्ली: भगवान गणेश  हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय भगवान माने जाते है। भगवान गणेश को रिद्धि सिद्धि और बुद्धि का देवता कहा जाता है। भारत में हर शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन किया जाता है

india TVश्री मयूरेश्वर मंदिर
गणपति जी का यह मंदिर पुणे से 80 किलोमीटर दूर स्थित है। मोरेगांव गणेशजी की पूजा का महत्वपूर्ण केंद्र है। मयूरेश्वर मंदिर के चारों कोनों में मीनारें हैं और लंबे पत्थरों की दीवारें हैं। यहां चार द्वार हैं। ये चारों दरवाजे चारों युग, सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग के प्रतीक हैं। इस मंदिर के द्वार पर शिवजी के वाहन नंदी बैल की मूर्ति स्थापित है, इसका मुंह भगवान गणेश की मूर्ति की ओर है। नंदी की मूर्ति के संबंध में यहां प्रचलित मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में शिवजी और नंदी इस मंदिर क्षेत्र में विश्राम के लिए रुके थे, लेकिन बाद में नंदी ने यहां से जाने के लिए मना कर दिया। तभी से नंदी यहीं स्थित है। नंदी और मूषक, दोनों ही मंदिर के रक्षक के रूप में तैनात हैं। मंदिर में गणेशजी बैठी मुद्रा में विराजमान है तथा उनकी सूंड बाएं हाथ की ओर है तथा उनकी चार भुजाएं एवं तीन नेत्र हैं।
मान्यताओं के अनुसार मयूरेश्वर के मंदिर में भगवान गणेश द्वारा सिंधुरासुर नामक एक राक्षस का वध किया गया था। गणेशजी ने मोर पर सवार होकर सिंधुरासुर से युद्ध किया था। इसी कारण यहां स्थित गणेशजी को मयूरेश्वर  नाम प्रचलित हो गया है।

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