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भिंड में MSP घोटाले का खुलासा, चार फर्जी किसानों के खिलाफ केस दर्ज, दूसरों की जमीन पर रजिस्ट्रेशन कर बेची फसल

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Jun 26, 2026 11:47 am IST,  Updated : Jun 26, 2026 11:47 am IST

भिंड में MSP घोटाले में दूसरे किसानों की जमीन पर रजिस्ट्रेशन करवाकर फसल बेचने का मामला सामने आया है। इसमें 4 फर्जी किसानों पर FIR दर्ज की गई है। चार में से तीन नाम महिला किसानों के हैं।

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एसडीओपी रविंद्र वास्कले Image Source : INDIA TV

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य अपर सरकार द्वारा खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रारंभिक जांच के बाद दूसरों की जमीन पर रजिस्ट्रेशन करवाने वाले चार किसानों पर गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर दी गई है, जिनमें तीन नाम महिलाओं के हैं। लहार अनुभाग के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की शिकायत पर लहार थाना में मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच के बाद एफआईआर की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, किसानों को समृद्ध बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किसानों को अपनी फसल का उचित भुगतान देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना चलाई जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में किसान इसमें पंजीयन नहीं कर पाते जिसका फायदा किसान माफिया उठा रहे हैं।

चार फर्जी किसानों ने बेची दूसरों की फसल

भिंड में ऐसे ही मामलों का खुलासा हुआ है, जिसमें कुछ फर्जी किसानों ने दूसरों की जमीन पर एसपी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया और फसल भी सरकार को बेच दी। यही नहीं उनके खातों में भुगतान भी कर दिया गया मामला खुलने के बाद इसकी जांच की गई, जिसमें प्रारंभिक जांच में तीन महिला किसान सहित कुल चार किसानों पर लहर के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुद्गल की शिकायत पर लहर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना को गेहूं उपार्जन में फर्जी पंजीयन की शिकायत मिली थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने लहार एसडीएम एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुदगल को जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान खाद्य विभाग से प्राप्त किसान पंजीयन सूची का राजस्व अभिलेखों से मिलान कराया गया, जिसमें पाया गया कि कुछ किसानों ने फर्जी तरीके से दूसरे किसानों की जमीन पर पंजीयन करवा लिए गए, जबकि संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा खसरों का सत्यापन भी कर दिया गया। 

फर्जी किसानों के खिलाफ केस दर्ज

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन खसरों और सर्वे नंबरों के आधार पर आरोपियों ने किसान पंजीयन कराया था। उन जमीनों में उनका नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज ही नहीं था। इसके अलावा वास्तविक भूमि मालिकों से कोई लिखित अनुमति भी नहीं ली गई थी और न ही बटाई अथवा खेती संबंधी कोई वैध अनुबंध प्रस्तुत किया गया था। प्रशासनिक जांच में लिधौरा गांव निवासी संचिता पाठक, लालपुरा निवासी गिरिजा, प्रतीक्षा तथा वीर सिंह तोमर के पंजीयन संदिग्ध और फर्जी पाए गए। जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई की अनुशंसा की। जिसके आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 420 एवं 34 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली।

पुलिस ने MSP घोटाले पर दी बड़ी अपडेट

एसडीओपी रविंद्र वास्कले के अनुसार आरोपी संचिता पाठक ने जैतपुरा समिति के माध्यम से विभिन्न गांवों के 18 खसरों को जोड़कर अपना किसान पंजीयन कराया था। वहीं आरोपी गिरिजा और प्रतीक्षा ने लालपुरा गांव के खसरों के आधार पर निवसाई समिति में पंजीयन कराया। चौथे आरोपी वीर सिंह तोमर ने दबोह, टोला और बरेई गांव के पांच सर्वे नंबरों को आधार बनाकर किसान पंजीयन कराया था। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का उद्देश्य सरकारी उपार्जन केंद्रों पर अवैध रूप से गेहूं बेचकर आर्थिक लाभ अर्जित करना था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। अगर मामले की सही तरीके से जांच हो तो MSP पंजीयन घोटाला जिले का बड़ा आर्थिक अपराध साबित हो सकता है।

(परानिधेश भारद्वाज)

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