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स्कूल बसों को लेकर हाई कोर्ट की गाइडलाइंस जारी, CCTV कैमरा अनिवार्य, 12 साल से ज्यादा पुरानी बसें बैन

 Published : Dec 05, 2024 09:30 pm IST,  Updated : Dec 05, 2024 09:30 pm IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्कूल बसों को लेकर कई गाइडलाइंस जारी की हैं जिनमें स्कूल बसों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम, स्पीड गवर्नर और CCTV कैमरा लगाया जाना शामिल है।

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मध्य प्रदेश में स्कूल बसों को लेकर हाई कोर्ट ने गाइडलाइंस जारी की हैं। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

इंदौर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 2018 में इंदौर में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की एक तेज रफ्तार बस हादसे में 4 मासूम बच्चों की मौत को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर स्कूल बसों को चलाने को लेकर गाइडलाइंस जारी कीं हैं। इन गाइडलाइंस में स्कूल बसों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम व CCTV कैमरा लगाने और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों को काम पर नहीं रखा जाना जैसे निर्देश शामिल हैं। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी ने DPS बस हादसे से जुड़ी 6 जनहित याचिकाओं का बुधवार को निपटारा किया।

 हर स्कूल बस में GPS ट्रैकिंग सिस्टम जरूरी

2 जजों की इस बेंच ने रेखांकित किया कि सूबे में स्कूल बसों को चलाने को लेकर तय नियम-कायदे नहीं हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक राज्य सरकार 1994 के मध्य प्रदेश मोटरयान नियमों में उचित बदलाव नहीं करती, तब तक कोर्ट प्राइवेट और सरकारी स्कूलों/कॉलेजों, कोचिंग केंद्रों, खेल अकादमियों आदि की बसों में सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस तय कर रही है। कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर स्कूल बस में GPS ट्रैकिंग सिस्टम और CCTV कैमरा लगाया जाएगा ताकि बच्चों के अभिभावक मोबइल ऐप के जरिए गाड़ियों पर नजर रख सकें।

ड्राइवरों को लेकर जारी हुए ये दिशा-निर्देश

गाइडलाइंस के मुताबिक, 12 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को स्कूल बस के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और हर स्कूल बस में ‘स्पीड गवर्नर’ लगाया जाएगा। दिशा-निर्देशों में स्कूल बसों के ड्राइवरों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि ऐसे ड्राइवरों को स्कूल बस चलाने के काम पर नहीं रखा जाएगा जिन पर सड़क की ‘लेन’ सिस्टम और ट्रैफिक सिग्नल को तोड़ने जैसे अपराधों के लिए एक साल में 2 से ज्यादा बार जुर्माना लगाया गया हो।

5 जनवरी 2018 को हुआ था भयानक हादसा

गाइडलाइंस के मुताबिक, जिस ड्राइवर का तेज स्पीड में गाड़ी चलाने, शराब पीकर गाड़ी चलाने और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने जैसे अपराधों के लिए एक बार भी चालान काटा गया हो, उसे स्कूल बस चलाने के काम पर नहीं रखा जाएगा और स्कूल को उससे इस बारे में हलफनामा लेना होगा। DPS की तेज रफ्तार बस इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र के बाइपास रोड पर 5 जनवरी 2018 की शाम डिवाइडर फांदकर बराबर वाली लेन में जा घुसी थी और सामने से आ रहे ट्रक से भिड़ गई थी। इस भीषण दुर्घटना में 6 से लेकर 13 साल की आयु के 4 स्कूली बच्चों के साथ बस ड्राइवर की मौत हो गई थी। (भाषा)

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