मध्य प्रदेश में पेयजल को लेकर NGT ने गठित की कमेटी, ये 14 कड़े दिशा-निर्देश भी जारी
मध्य प्रदेश में पेयजल को लेकर NGT ने गठित की कमेटी, ये 14 कड़े दिशा-निर्देश भी जारी
Reported By : Anurag AmitabhEdited By : Subhash Kumar
Published : Jan 16, 2026 12:20 pm IST,
Updated : Jan 16, 2026 03:03 pm IST
मध्य प्रदेश में पेयजल को लेकर एनजीटी (NGT) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने दूषित पानी को 'संविधान के अनुच्छेद 21' का उल्लंघन बताया है। एनजीटी ने आईआईटी इंदौर और सीपीसीबी से पेयजल की मॉनिटरिंग कराने की बात कही है।
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सांकेतिक फोटो।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने मध्य प्रदेश के शहरों में सीवेज मिश्रित और दूषित पेयजल की आपूर्ति को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए आज एक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने राज्य शासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय की है। एनजीटी ने निर्देश जारी किए हैं और आईआईटी इंदौर और सीपीसीबी को जांच करने को कहा है। राज्य के सभी कलेक्टरों और निगमायुक्तों को भी इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
IIT इंदौर और CPCB की संयुक्त जांच समिति गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए, ट्रिब्यूनल ने जमीनी हकीकत की जांच के लिए एक 6-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो 6 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। समिति के सदस्य नीचे बताए गए हैं-:
आईआईटी (IIT), इंदौर के निदेशक द्वारा नामांकित विशेषज्ञ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भोपाल के प्रतिनिधि।
प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग, म.प्र. शासन।
प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग।
जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि।
म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के प्रतिनिधि (नोडल एजेंसी)।
एनजीटी ने जारी किए 14-सूत्रीय सख्त निर्देश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने राज्य भर में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित विस्तृत निर्देश जारी किए हैं:
MIS और 24x7 वाटर ऐप: एक मजबूत 'प्रबंधन सूचना प्रणाली' (MIS) और मोबाइल ऐप बनाया जाए, जिस पर पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट, सप्लाई का समय और शिकायत निवारण की जानकारी हो।
GIS मैपिंग: पूरे राज्य में पेयजल और सीवेज लाइनों की 'GIS-आधारित मैपिंग' हो ताकि यह पता चले कि कहाँ सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है।
एरेशन और क्लोरीनेशन: पानी की शुद्धता के लिए प्री-क्लोरीनेशन, पोस्ट-क्लोरीनेशन के साथ-साथ 'एरेशन प्रक्रिया' (Aeration process) अनिवार्य रूप से अपनाई जाए।
टैंको की सफाई: सभी ओवरहेड टैंकों और सम्प-वेल (Sumps) को हमेशा चालू रखा जाए और उनकी नियमित सफाई व क्लोरीनेशन हो।
पाइपलाइन मरम्मत: लीकेज और ट्रांसमिशन लॉस को रोकने के लिए युद्धस्तर पर पाइपलाइनों की मरम्मत हो।
अतिक्रमण हटाना: जल स्रोतों (तालाब, कुएं, बावड़ी) के आसपास से सभी प्रकार के अतिक्रमण तुरंत हटाए जाएं।
ग्रीष्मकालीन जल प्रबंधन: मार्च से जुलाई के बीच पानी की कमी को देखते हुए निर्माण कार्यों पर रोक लगे और वार्ड-वार राशनिंग (वैकल्पिक दिन) की व्यवस्था हो।
जल पुनर्चक्रण (Recharge): सार्वजनिक कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित (Regenerate) करने की योजना लागू की जाए।
सख्त वाटर हार्वेस्टिंग: सरकारी और निजी भवनों (स्कूल/कॉलेज सहित) में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य हो। पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई (Punitive action) की जाए।
क्या करें-क्या न करें: नागरिकों के लिए पानी के उपयोग के संबंध में 'Do's and Don'ts' जारी किए जाएं।
डेयरियों का विस्थापन: शहर सीमा के भीतर 2 से अधिक पशुओं वाली सभी डेयरियों को 4 महीने के भीतर शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए।
मूर्ति विसर्जन पर पूर्ण रोक: किसी भी पेयजल स्रोत (डैम, तालाब) में मूर्तियों का विसर्जन पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
मीटरिंग: सभी घरेलू और व्यावसायिक पानी के कनेक्शनों पर मीटर लगाए जाएं।
टैंकर आपूर्ति: जल संकट के समय टैंकरों से आपूर्ति के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ योजना तैयार रहे।
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