महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर शहर से सटे सातारा गांव में जिला परिषद स्कूल के सामने अवैध गर्भपात का बड़ा मामला उजागर हुआ है। प्रशासन ने रविवार शाम छापा मारकर गर्भलिंग चयन निषेध कानून का उल्लंघन करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में दो सगी बहनों और एक महिला के पति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस पूरे नेटवर्क की मुख्य आरोपी बताई जा रही महिला नर्स अभी भी फरार है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मारा छापा
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय महिला को गर्भपात कराने के लिए आरोपी महिला, उसका पति और ननद यहां लेकर आए थे। इसी दौरान पहले से तैयार पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर सभी को रंगेहाथ पकड़ लिया।
मुख्य फरार आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस को सातारा थाना क्षेत्र में इस तरह की अवैध गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद सबूत जुटाकर कार्रवाई की योजना बनाई गई। इस सूचना को मनपा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉक्टर पारस मंडाले के साथ साझा किया गया और संयुक्त रूप से छापेमारी की गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
अवैध गर्भपात मामले में कड़ी सजा का प्रावधान
बता दें कि भारत में अवैध गर्भपात के मामलों में सजा भारतीय दंड संहिता (IPC) और Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act, 1971 के नियमों के आधार पर तय होती है। सजा इस बात पर निर्भर करती है कि अपराध किस तरह का है।
महिला की सहमति से अवैध गर्भपात (IPC धारा 312) अगर गर्भपात नियमों के बाहर कराया गया हो। इस मामले में जेल अधिकतम 3 साल तक हो सकती है। वहीं, महिला की बिना सहमति के गर्भपात कराया जाता है तो IPC धारा 313 के तहत केस दर्ज किया जाएगा। इस मामले में उम्रकैद (Life Imprisonment) या 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही
जुर्माना भी लगाया जाएगा।