मुंबई में बढ़ती जनसंख्या, शहरी विस्तार और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शहर में पुलिस बल के ढांचे को और सुदृढ़ करने का बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग ने 12 दिसंबर 2025 को जारी शासन निर्णय में मुंबई पुलिस आयुक्तालय के तहत चार नए पुलिस थानों, दो नए परिमंडलों और तीन नए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विभागों के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
नए पुलिस थानों की पहचान
सरकार द्वारा स्वीकृत नए पुलिस थाने हैं- महाराष्ट्र नगर, गोलीबार, मढ मार्वे और असल्फा पुलिस स्टेशन। इन चारों थानों के लिए कुल 1448 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है, जिनमें पुलिस निरीक्षक, सहायक निरीक्षक, उपनिरीक्षक, हवालदार, सिपाही और अन्य आवश्यक पद शामिल हैं। इसके अलावा प्रत्येक नए थाने के लिए सफाई कर्मचारियों की सेवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से ली जाएगी। सरकार ने दस्तावेज़ में स्पष्ट किया है कि इन चारों पुलिस थानों के लिए होने वाला कुल आवर्ती खर्च 124.13 करोड़ रुपये होगा, जबकि अनावर्ती खर्च 7.39 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
दो नए परिमंडल बनाए जाएंगे
इसके साथ ही, मुंबई पुलिस के मौजूदा 13 परिमंडलों की पुनर्रचना करते हुए दो नए परिमंडल बनाए जाएंगे। इन परिमंडलों के संचालन के लिए कुल 34 पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें दो पुलिस उपायुक्त (DCP), लिपिकीय कर्मचारी, हवालदार और वाहन चालक शामिल हैं। इन परिमंडलों पर 6.24 करोड़ रुपये का वार्षिक आवर्ती खर्च आएगा, जबकि 83.95 लाख रुपये का अनावर्ती खर्च स्वीकृत किया गया है।
तीन नए ACP विभाग बनेंगे
इसी क्रम में, मुंबई में तीन नए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विभाग भी बनाए जा रहे हैं। इनके लिए कुल 30 पदों को मंजूरी दी गई है। इन विभागों में एक-एक ACP के साथ हवालदार, सिपाही, वाहन चालक और सफाई कर्मचारी शामिल होंगे। इनके लिए भी आवश्यक खर्च को वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट से वहन करने की अनुमति दी गई है।
सरकार को भेजना होगा प्रस्ताव
सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि नए पुलिस थानों के क्षेत्राधिकार निर्धारण (jurisdiction mapping) का प्रस्ताव मुंबई पुलिस आयुक्त को तैयार कर सरकार को भेजना होगा। साथ ही सफाई कर्मियों की नियुक्ति 27 अप्रैल 2022 के शासन निर्णय में उल्लेखित नियमों के अनुसार ही की जाएगी।
क्यों लिया गया फैसला?
सीएम फडणवीस ने यह निर्णय मुंबई में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या घनत्व और बढ़ते अपराध दबाव को देखते हुए लंबे समय से नए पुलिस थानों की मांग की जा रही थी। अब नई स्वीकृत इकाइयों के चालू होने से पुलिस बल के कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि स्थानीय क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है।
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