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मुंबई में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य की पुलिस फायरिंग में मौत, जानें पूरा घटनाक्रम

 Reported By: Sachin Chaudhary,  Saket Rai,  Dinesh Mourya,  Rajesh Kumar,  Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Oct 30, 2025 11:04 pm IST,  Updated : Oct 30, 2025 11:56 pm IST

मुंबई के पवई इलाके में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। आरोपी ने फिल्म ऑडिशन के बहाने बच्चों को बंधक बनाया था। पुलिस ने बचाव अभियान चलाकर सभी बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया। मामला अब मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है।

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रोहित आर्य ने रा स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाया था। Image Source : REPORTER INPUT

मुंबई/पुणे: मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार दोपहर हुई एक सनसनीखेज घटना में रोहित आर्य नाम के शख्स ने 17 बच्चों को बंधक बना लिया था। पुलिस ने बच्चों को छुड़ाने के लिए गोली चलाई, जिसमें रोहित को सीने में गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सभी 17 बच्चों को सात हिल्स अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया, 'यह बंधक बच्चों को छुड़ाने के लिए पुलिस द्वारा की गई फायरिंग थी। इसलिए इसे मुठभेड़ नहीं कहा जा सकता। पुलिस ने बंधक बच्चों को छुड़ाने के लिए गोली चलाई और गोली आरोपी (रोहित आर्य) को लगी, जिससे वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।'

ऑडिशन के नाम पर रचा था पूरा खेल

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रोहित आर्य ने पूरी प्लानिंग के साथ अलग-अलग जगहों से अभिभावकों को बुलाया। उसने बताया था कि फिल्म का ऑडिशन चल रहा है। एक परिवार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके परिवार से 3 लोग कोल्हापुर से बच्चे को लेकर मुंबई आए थे। वे रिश्तेदार के पास रुके थे और ऑडिशन के लिए आए थे। ऑडिशन तीन दिन का बताया गया था। कुछ राउंड के बाद जब वे वापस जाने लगे तो रोहित ने अपील की कि एक दिन और रुक जाएं। गुरुवार की दोपहर घटना शुरू होने से पहले रोहित ने बच्चों को एक तरफ कर लिया और खुद को बंद कर लिया। पूरी प्लानिंग के बाद उसने एक वीडियो शूट किया और मीडियाकर्मियों को भेज दिया।

केसरकर से बात करने की हुई कोशिश

बच्चों को किडनैप करने के बाद आरोपी ने अपना वीडियो वहां मौजूद अभिभावकों को दिया और कहा, 'इसे शेयर करो।" किडनैपिंग की बात सुनकर अभिभावक डर गए। सोसाइटी में हड़कंप मच गया। दोपहर करीब 1:30 बजे सोसाइटी का एक सदस्य पुलिस स्टेशन पहुंचा और पूरा घटनाक्रम बताया। पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। करीब घंटेभर पुलिस और आरोपी के बीच फोन पर बातचीत हुई। शुरू में आरोपी पुलिस की बात सुन रहा था और सहयोग कर रहा था। उसने दीपक केसरकर का मामला भी पुलिस को बताया। पुलिस ने कहा, 'अगर आप चाहें तो मैं आपकी बात दीपक केसरकर से करवाता हूं।' पुलिस ने दीपक केसरकर को फोन किया, लेकिन व्यस्तता की वजह से उन्होंने फोन नहीं उठाया।

रोहित को लगी API अमोल की गोली

घंटेभर बाद आरोपी ने रिस्पॉन्ड करना बंद कर दिया। उसने पुलिस ने कहा, 'मुझे तुम पर भरोसा नहीं है।' जब आरोपी नहीं माना तो पुलिस की एक टीम बाथरूम के रास्ते स्टूडियो में दाखिल हुई। आरोपी ने बच्चों को दो ग्रुप में बांटा था। कुछ बच्चों को एक कमरे में बंद कर रखा था और कुछ को अपने पास रखा था। जैसे ही टीम अंदर दाखिल हुई, हड़कंप मच गया। सबसे आगे एपीआई अमोल वाघमारे सिविल ड्रेस में थे। सिविल ड्रेस की वजह से आरोपी उन्हें पहचान नहीं पाया। आरोपी रोहित आर्य ने पूछा, 'तुम कौन हो, अंदर कैसे आए?' और वह अपने बैग की तरफ कुछ निकालने के लिए झुका। इतने में एपीआई अमोल ने रोहित आर्य के सीने पर एक राउंड फायर कर दिया, जिससे वह घायल हो गया और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

मुंबई के चेम्बूर में था रोहित का ठिकाना

रोहित आर्य मुंबई के चेम्बूर इलाके में अन्नपूर्णा सोसाइटी में रह रहा था। इस सोसाइटी में उसकी बहन प्रीति घरे का नौवीं मंजिल पर फ्लैट है। उसकी बहन और परिवार विदेश में रहता है, इसलिए फ्लैट खाली था। रोहित कभी-कभी यहां रहने आता था। चार दिन पहले रविवार से वह यहीं रह रहा था। आज सुबह यहीं से पवई निकला था। पुलिस की एक टीम इस सोसाइटी में भी आई है और पूछताछ व जांच कर रही है।

'सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया'

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह मामला एक अनोखे तरीके से सामने आया है। उन्होंने कहा, 'आरोपी ने 17 बच्चों को अलग कारण से बुलाकर अगवा करके धमकी देने का काम किया, उनकी जान को खतरे में डालने का काम किया। मुंबई पुलिस ने बेहतरीन काम करते हुए सटीक कार्रवाई की। आरोपी की मृत्यु हो गई है। सभी 17 बच्चों को एक खरोंच तक नहीं आने दी गई, और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।'

दीपक केसरकर ने मामले पर क्या कहा?

महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने इंडिया टीवी से फोन पर बातचीत में कहा, 'रोहित आर्य का यह दावा कि उसके दो करोड़ रुपये शिक्षा विभाग पर बकाया है तो यह गलत है। रोहित ने अगर शिक्षा विभाग के लिए काम किया है तो उसकी रसीद उसे शिक्षा विभाग में जमा करना चाहिए था। मैंने खुद रोहित के मुद्दे पर शिकायत पर तीन से चार बार शिक्षा विभाग की बैठक ली थी। रोहित आर्य ने कुछ वेबसाइट शुरू किए थे। इन वेबसाइट के जरिए उसने अभिभावकों से पैसे लिए थे। रोहित के इस हरकत पर शिक्षा विभाग में आपत्ति जताई थी। इस पर रोहित आर्य से सफाई मांगी गई थी लेकिन वह सफाई नहीं दे पाया। पुलिस ने आज मुझे फोन किया था लेकिन मैं उठा नहीं पाया।'

रोहित के आरोप पर शिक्षा विभाग की सफाई

रोहित आर्य के आरोप पर महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने सफाई दी। शिक्षण सचिव रणजीत सिंह देओल ने कहा कि स्वच्छता मॉनिटर प्रोजेक्ट के लिए रोहित आर्य को 2 करोड़ रुपये देने का कोई समझौता नहीं हुआ था। उन्होंने यह काम स्वेच्छा से किया था और इस कार्य के लिए उन्हें प्रमाणपत्र दिया गया था। उन्होंने कहा, 'इसके बाद वे सरकार के साथ ‘माझी शाला सुंदर शाला’ कार्यक्रम को लागू करने के लिए चर्चा में थे, लेकिन वह कार्यक्रम अंतिम रूप नहीं ले सका। महाराष्ट्र सरकार पर रोहित आर्य का कोई बकाया नहीं है।'

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