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'हिंसा हारी, मोहब्बत जीती', दो खूंखार नक्सलियों ने लिए सात फेरे; पुलिस बनी बाराती

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jun 04, 2026 12:51 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 12:51 pm IST

हिंसा का रास्ता छोड़ने के छह महीने बाद दो नक्सलियों ने शादी करके अपनी ज़िंदगी का एक नया अध्याय शुरू किया है। पुलिस के अनुसार, यह शादी पूर्व अपराधियों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल मुख्यधारा की ज़िंदगी के बारे में एक मज़बूत संदेश देती है।

दो पूर्व नक्सलियों ने की शादी- India TV Hindi
दो पूर्व नक्सलियों ने की शादी Image Source : REPORTER

गोंदियाः कभी हाथों में एके-47 लेकर जंगलों में खौफ का दूसरा नाम रहे दो बड़े माओवादी चेहरों ने अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है। वर्षों तक हिंसा और अनिश्चितता के साये में जीने वाले छत्तीसगढ़ के 'गोलू' और मध्य प्रदेश की 'संगीता' अब हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए हैं। 

महाराष्ट्र के गोंदिया पुलिस मुख्यालय के 'प्रेरणा सभागार' में 31 मई रविवार को जब इस अनोखी शादी की शहनाई बजी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से नम हो गईं। यहां पुलिस अधिकारी सिर्फ सुरक्षाकर्मी नहीं, बल्कि इस शादी के 'घराती और बाराती' बने नजर आए।

खूंखार कमांडर... अब गृहस्थी के सिकंदर

शादी के बंधन में बंधे वर-वधू कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि माओवादी संगठन के रीढ़ माने जाने वाले चेहरों में से हैं। दूल्हा (पांडू पुसू वड्डे उर्फ गोलू - 37 वर्ष) छत्तीसगढ़ के तहसील पाखंजूर जिला कांकेर का निवासी है। यह सीपीआई (माओवादी) संगठन में दर्रेकसा क्षेत्र में डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM) जैसे बड़े और खतरनाक पद पर सक्रिय था। वहीं दुल्हन (सैवंती रायसिंग पंधरे उर्फ संगीता - 36 वर्ष) मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के तहसील बैहर के ग्राम राशीमेटा  की निवासी है। यह दर्रेकसा एरिया कमेटी में एरिया कमेटी सदस्य (ACM)के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक  गोरख भामरे ने कहा-यह विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवर्तन, पुनर्मिलन, विश्वास और शांतिपूर्ण भविष्य की आशा का उत्सव है।

खूनी रास्तों से 'वैवाहिक' सफर तक 'महा-परिवर्तन'

बता दें कि दोनों ने जंगलों की हिंसा से तंग आकर बीते 28 नवंबर 2025 को गोंदिया पुलिस के सामने सरेंडर किया था। जिले में अब तक कुल 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिन्हें पुलिस कॉलोनी में सुरक्षित रखा गया है। समाज में सम्मान से जीने और अपना परिवार बसाने की चाहत ने इन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे की अनुमति और प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभय डोंगरे के मार्गदर्शन में इस 'हृदयस्पर्शी' विवाह को संपन्न कराया गया।

मुख्यधारा में वापसी: मिल रहे हैं नए अधिकार

सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अब इन दोनों युगल के नए जीवन को संवारने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन द्वारा इनके नागरिक दस्तावेज, मतदाता पहचान पत्र, आधार, वोटर आईडी, बैंक खाते और अन्य जरूरी कागजात तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही, इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुख (स्किल डेवलपमेंट) की  ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

जंगलों में छिपे नक्सलियों को बड़ा संदेश

गोंदिया पुलिस मुख्यालय में बिना किसी बाधा के संपन्न हुई यह शादी सीधे तौर पर उन नक्सलियों को कड़ा संदेश है जो आज भी भटक रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि यदि वे हिंसा छोड़ते हैं, तो सरकार और समाज उन्हें न केवल सुरक्षा देगा, बल्कि खुशहाली से जिंदगी जीने का हक भी देगा। इस पूरे महा-आयोजन को सफल बनाने में पुलिस निरीक्षक प्रमोद भातनाते, राजेश सरोदे, श्रीकांत हत्तीमारे, मल्लिकार्जुन वासुदेव सहित सी-60 कमांडो पथक और नक्सल सेल के जांबाज अधिकारियों ने अपनी अहम भूमिका निभाई।

रिपोर्ट- रवि आर्य, गोंदिया

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